हिमालय से सटे भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराना रोटी-बेटी का रिश्ता एक बार फिर जीवंत हो उठा है। पहाड़ में गहराते लैंगिक असंतुलन और बेटियों की कमी के बीच जिले के एक युवा ने रूढ़िवादिता की दीवार को ढहाते हुए अंतरराष्ट्रीय विवाह की मिसाल पेश की है। जिले के ऐतिहासिक राधाकृष्ण मंदिर में जब नेपाल की मनीषा और जिले के मनोज ने अग्नि के सात फेरे लिए। यह क्षण दो परिवारों के मिलन और दो देशों की सांस्कृतिक एकता का संगम बन गया।
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नेपाल की मनीषा और पड़ाई के मनोज की कहानी जिले के दुग नाकुरी तहसील के सुंदिल गांव से शुरू हुई। नेपाल के कर्णाली प्रदेश के कालोकोट जिला निवासी पदम बहादुर अपने परिवार के साथ सुंदिल में रहते थे। इस दौरान पड़ाई गांव निवासी मनोज मेहरा से जान-पहचान हुई। वक्त के साथ उनकी पुत्री मनीषा शाही और मनोज के बीच यह परिचय प्रेम में बदला और दोनों ने इस पवित्र बंधन को शादी का नाम देने का निर्णय लिया। विदेशी सरजमीं पर रिश्तों को लेकर ग्रामीण समाज में हिचकिचाहट देखी जाती है लेकिन मनोज और मनीषा के अटूट प्रेम के आगे परिजनों ने खुशी-खुशी अपनी सहमति दे दी।