नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बाद पॉलिथीन, थर्माकोल से बने उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है लेकिन बागेश्वर में इस प्रतिबंध का कोई असर नहीं दिखा है। प्रतिबंध के बावजूद न तो पॉलिथीन बंद हुआ है और न ही थर्माकोल से बने उत्पादों की बिक्री रुकी है।
पॉलिथीन के अत्यधिक प्रयोग के कारण पर्यावरण को भारी क्षति पहुंच रही है। पॉलिथीन से खतरनाक प्रदूषण फैल रहा है। इसके उपयोग से जनस्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। कूड़े की गंभीर समस्या के लिए भी पॉलिथीन ही मुख्य रूप से जिम्मेदार है।
पॉलिथीन के दुष्प्रभावों को देखते हुए इसको लंबे समय से प्रतिबंधित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब पॉलिथीन के साथ ही थर्माकोल से बने उत्पादों को भी जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक घोषित कर दिया गया है। थर्माकोल से बने गिलास, पत्तलों के प्रयोग पर पांच हजार रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।
बावजूद इसके बागेश्वर में एनजीटी के आदेशों का असर नजर नहीं आ रहा है। यहां पर पॉलिथीन के साथ ही थर्माकोल से बने उत्पादों की बिक्री हो रही है। गंभीर बात यह है कि यहां पर पॉलिथीन को प्रयोग में लाने के बाद कूड़े के साथ नदियों में फेंक दिया जाता है। इससे सरयू, गोमती नदियां प्रदूषित हो रही हैं।