राष्ट्रीय खेलों में उत्तराखंड के लिए पहला पदक जीतने वाली ज्योति वर्मा ने पुलिस भर्ती प्रशिक्षण के दौरान वुशू की बारीकियां सीखीं। राष्ट्रीय खेलों से पहले उन्होंने 45 दिन की कड़ी ट्रेनिंग ली। भले ही वह गोल्ड मेडल से चूक गई लेकिन पदक के लिए की गई उनकी मेहनत से कांसा भी सोने सा चमक रहा है। बेटी की उपलब्धि से कांडा तहसील के सुनारगांव में खुशी का माहौल है।
ज्योति ने बताया कि उनके पिता राजेंद्र लाल वर्मा गांव में ही दुकान चलाते हैं और मां भगवती गृहिणी हैं। राइंका कांडा से 12वीं पास करने के बाद उन्होंने राजकीय महाविद्यालय कांडा से स्नातक की डिग्री हासिल की। 2016 में उनका उत्तराखंड पुलिस में चयन हुआ। पुलिस प्रशिक्षण के दौरान उनकी मुलाकात वुशू की कोच अंजना रानी सकपाल से हुई। कोच सकपाल ने ही उन्हें खेलने के लिए प्रेरित किया। एक बार खेल से परिचय होने के बाद वुशू उनके जीवन का हिस्सा बन गया।
वर्तमान में जिले में महिला आरक्षी पद पर तैनात ज्योति ने राष्ट्रीय खेल शुरू होने से पहले 45 दिन का कड़ा प्रशिक्षण लिया। बुधवार को देहरादून में वुशू की चांगक्वान स्पर्धा में उन्होंने कांस्य पदक जीता।
एसपी समेत पूरे पुलिस परिवार ने जताई खुशी
महिला आरक्षी ज्योति वर्मा के राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने पर एसपी चंद्रशेखर आर घोड़के समेत पूरे पुलिस परिवार ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि ज्योति ने समय-समय पर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की वुशू प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर कई पदक जीते हैं। उनकी उपलब्धि पर विधायक सुरेश गढ़िया, भाजपा उपाध्यक्ष आनंद धपोला, हीरा सिंह कर्म्याल, जितेंद्र वर्मा, दीप लाल वर्मा, वीरेंद्र नगरकोटी, आलम सिंह मेहरा आदि ने भी खुशी जताई है।