कृषि विज्ञान केंद्र में ढिंगरी मशरूम उत्पादन विषय पर ग्रामीण युवाओं के लिए आयोजित तीन दिनी प्रयोगात्मक कृषक प्रशिक्षण शिविर का समापन हो गया है। केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ हरीश चंद्र जोशी ने ढिंगरी मशरूम के उत्पादन के लिए भूसा तैयार करने की विधि से लेकर फसल का रखरखाव, बीमारी तथा कीटों से बचाव मशरूम की तुड़ाई तथा भंडारण के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती से आमदनी दोगुनी होती है।
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर में केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ जोशी ने कहा कि गर्मियों में 18 से 26 डिग्री तापमान में बंद कमरे में इसे आसानी से उगाया जा सकता हैं जिससे जंगली जानवरों से कोई नुकसान नहीं होता है। मशरूम प्रोटीन का एक बहुत अच्छा स्रोत है इसमें 37.19 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है। प्रोटीन के अलावा इसमें मिनरल्स और विटामिंस भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही इसका सेवन अनेक बीमारियों में जैसे हृदय रोग, सूखा रोग एवं मधुमेह आदि में लाभकारी है।
ढिंगरी मशरूम को गेहूं के भूसे, धान के पुआल, मक्का के तने, सोयाबीन एवं दलहनी फसलों के भूसे पर आसानी से उगाया जा सकता है इसको उगाने के लिए किसी भी प्रकार के कंपोस्ट की आवश्यकता नहीं होती। इसका उत्पादन आर्थिक दृष्टि से सस्ता है।
इसकी फसल बीजाई करने के 20 से 25 दिन बाद तैयार होने लगती है। प्रशिक्षण के दौरान कृषकों को दस किलो मशरूम का बीज (स्पान) वितरित किया गया। कार्यक्रम में सहायक निधि सिंह ने मशरूम का अचार व सुखाने की विधि के बारे में बताया, प्रक्षेत्र प्रबंधक मेदनी प्रताप सिंह ने कृषकों को प्रक्षेत्र में लगी प्याज की फसल के बीजोत्पादन तकनीकी के विषय में बताया। वहां प्रगतिशील काश्तकार शहयात सिंह, शेर सिंह, ग्राम प्रधान छौना मोहन सिंह, स्वयंसेवी संस्था कपकोट के प्रहलाद सिंह कोश्यारी समेत कुल 22काश्तकार मौजूद थे।