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दो माह से बंद हैं जिले की अधिकांश ग्रामीण सड़कें 

Sun, 21 Aug 2016 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
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सड़क - फोटो : अमर उजाला
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 बागेश्वर जनपद की ग्रामीण सड़कों का बुरा हाल है। विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर सड़कें तो बना दी गई लेकिन मानकों के अनुसार सड़कों का निर्माण न होने से हर साल बरसात में इन सड़कों की हालत बदतर हो जाती है। इन सड़कों में वाहन संचालन तो दूर पैदल आवाजाही करने में भी जान का जोखिम बना रहता है। यही हाल कपकोट की पोथिंग-भटोड़ा- उछात सड़क का भी है। 
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 मातोली, मेन पोथिंग, दूनी, उच्छात, शामाढुंगा आदि गांवों के तीन सौ परिवारों को यातायात सुविधा का लाभ देने के लिए वर्ष 2011-12 में बनी सड़क बदहाल पड़ी है। हालात यह हैं कि इस सड़क के निर्माण के बाद लगातार छह माह भी वाहनों का संचालन नहीं हो सका। हर साल सड़क बरसात शुरू होते ही बंद हो जाती है। इस साल पिछले दो माह से सड़क बंद है। जगह-जगह पर मलबे के ढेर लगे हुए हैं। सड़क की हालत कुछ स्थानों पर घोड़ों के रास्ते से भी बदतर बनी हुई है।

दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली आबादी पैदल ही आवाजाही कर रही है। यही हाल जनपद के अन्य ग्रामीण मोटर मार्गों के भी हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्र की इन सड़कों में न तो मानकों के अनुसार नालियों का निर्माण किया गया है और न ही कलमठ बनाए गए हैं। नालों व गधेरों में बरसात के सीजन में वाहनों के बहने का खतरा बना रहता है। परंतु इस समस्या पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता है। कई गांवों में यातायात सुविधा के नाम पर सड़कें तो काट दी लेकिन फिर सुध नहीं लेने से यह सड़कें पैदल मार्ग सरीखी रह गई हैं। 
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जिले के आठ मोटर मार्ग अभी भी बंद
बागेश्वर। आपदा के कारण जिले के आठ मोटर मार्ग अभी भी बंद पड़े हैं। इनमें पांच ग्रामीण मोटर मार्ग हैं। कपकोट-पिंडारी ग्लेशियर सड़क, कपकोट-पोथिंग-उछात, डंगोली-सैनी- गैली गांव, रिखाड़ी-बाछम, भनार-लाथी-नामतीचेटाबगढ़, धरमघर-माजखेत, बागेश्वर-गिरेछीना मोटर मार्ग शामिल हैं। इन सड़कों के बंद होने से हजारों की आबादी यातायात सुविधा से वंचित है। एडीएम एवं प्रभारी आपदा प्रबंधन एसएस जंगपांगी ने बताया कि बंद मोटर मार्गों को खोलने के निर्देश संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिए गए हैं। 
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