फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राज्य की आय बढ़ाने में कश्मीरी मैरीनो भेड़ें होंगी मददगार

Tue, 02 Feb 2016 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
विज्ञापन
विज्ञापन
  राज्य के उच्च हिमालयी क्षेत्र की जलवायु कश्मीरी मैरीनो नस्ल की भेड़ों के लिए मुफीद साबित हो रही है। इनकी ऊन राज्य की आमदनी का जरिया बनेगी। मैरीनो भेड़ों के विकास के लिए कृत्रिम गर्भाधान योजना को अपनाने वाला उत्तराखंड देश का तीसरा राज्य बन गया है। कपकोट विकास खंड के राजकीय भेड़ प्रजनन प्रक्षेत्र केंद्र शामा में इस समय 130 कश्मीरी मैरीनो भेड़ें पल रही हैं।
विज्ञापन

राजकीय भेड़ प्रजनन परिक्षेत्र केंद्र शामा के पशु चिकित्साधिकारी डा. कुमार सुबोध रंजन ने बताया कि शासन ने 58 हेक्टेयर भूमि में फार्म की स्थापना की है। पशुपालकों को उन्नत नस्ल की भेड़ें उपलब्ध कराने के लिए कश्मीर से लाई गईं मैरीनो नस्ल की भेड़ों को यहां रखा गया है। स्थानीय स्तर पर भेड़ों में कृत्रिम गर्भाधान किया जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान विकास नगर राजस्थान जाकर एक सप्ताह का कृत्रिम गर्भाधान और अन्य तकनीकों का प्रशिक्षण लिया। इससे पहले सिर्फ राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में ही यह तकनीक अपनाई थी। उन्होंने बताया कि जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र की जलवायु कश्मीर से मिलती जुलती होने के कारण यहां मैरीनो भेड़ों के उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं। बाद में राज्य के अन्य हिस्सों में भी यह कार्यक्रम चलाया जाएगा।
पशु चिकित्सक डा. कुमार सुबोध रंजन ने कहा कि मैरीनो नस्ल की भेड़ें राज्य की परंपरागत भेड़ों से अधिक गठीली होती हैं। इनकी ऊन सर्वोत्तम, अधिक बारीक और मुलायम होती है। साल में कुछ भेडे़ं दो मेमने पैदा करती हैं। इनमें घास चरने के लिए काफी ऊंचाई तक जाने की क्षमता होती है। प्रजनन में नर भेड़ों की संख्या अधिक होने पर उन्हें पिथौरागढ़, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिले के फार्मों में भेजा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन



विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें