तापमान बढ़ते ही जंगल एक बार फिर धधकने लगे हैं। जनपद में सिविल और आरक्षित वनों में आग लगने के कारण अब तक लाखों की वन्य संपदा का नुकसान हो चुका है। चीड़ के वनों में आग बुझाना वन विभाग के लिए भी चुनौती साबित हो रहा है।
जौलकांडे और बिलौना के ऊपरी क्षेत्र के जंगल सोमवार को दिन में आग की चपेट में आ गए। शाम तक चीड़ के जंगलों में लगी आग तेजी से फैल गई। रात भर जंगल सुलगते रहे। इसके अलावा गरुड़ क्षेत्र के जंगल भी आग की चपेट में हैं। कांडा क्षेत्र के कई जंगल फायर सीजन शुरू होने से पहले ही आग की चपेट में आ गए थे।
पिरूल इकट्ठा होने के कारण चीड़ के जंगलों में फिर से आग का खतरा बना हुआ है। डीएफओ एमबी सिंह ने बताया कि वनों की आग पर नियंत्रण के लिए कर्मचारियों केेेे निर्देशित किया गया हैं। जिले में क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। इसके अलावा जंगल की आग पर को काबू पाने के लिए ग्रामीणों से भी सहयोग मांगा जा रहा है। एक अप्रैल से फायर वाचरों की नियुक्ति की जाएगी। वनों में आग लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।