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कौसानी में कचरा और गंदगी देख रहे पर्यटक 

Mon, 28 Mar 2016 10:30 PM IST
ब्यूरो, पूरन दोसाद , कौसानी (बागेश्वर)।
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कौसानी - फोटो : अमर उजाला
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जिले के प्रवेश द्वार पर स्थित कौसानी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है। पर्यटन की दृष्टि से सुविख्यात यह क्षेत्र सीजन और अन्य मौकों पर देश विदेश के पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों, वीआईपी और वीवीआईपी से गुलजार होता है। देश के मैदानी भागों में बढ़ती गर्मी के साथ ही यहां पर्यटन सीजन शुरू हो गया है।
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देश-विदेश से पहुंचने वाले पर्यटकों की दर्शनीय स्थलों पर चहलकदमी बढ़ने लगी है। क्षेत्र के लोगों का पर्यटन ही मुख्य व्यवसाय है। इस सीजन का उन्हें लंबा इंतजार रहता है, लेकिन यहां सफाई और पथ प्रकाश जैसी व्यवस्थाएं चौपट हैं। 

...ऐसा है अपना कौसानी 
बांज, बुरांश और देवदार पेड़ों और विभिन्न किस्म के फूलों के बीच बसी कौसानी की सुंदरता पर प्रकृति ने जमकर लुटाया है। कौसानी से हिमालय की लंबी श्रृंखला दृष्टिगोचर होती है। हिमालय पर सूर्योदय और सूर्यास्त की क्रमश: सुनहरी और लालिमा किरणें तो लोगों को बरबस अपनी ओर खींचती हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अनाशक्ति आश्रम की स्थापना की थी। यहां से कत्यूूर और बोरारौ घाटी के अलावा सुदूरवर्ती क्षेत्रों के नयनाभिराम होते हैं। पर्यटकों के रहने खाने के लिए अच्छी खासी सुविधाएं हैं। होटल मालिकों ने सीजन को देखते हुए बेहतरीन तैयारी कर रखी है। प्रख्यात छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत की जन्मस्थली होने का गौरव भी इसी क्षेत्र को प्राप्त हुआ है। 
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सफाई व्यवस्था चौपट
पर्यटन सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन यहां सफाई व्यवस्था चौपट है। नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। जगह-जगह लगे कूड़े ढेर लगे हैं। इससे पर्यटकों के साथ ही हर कोई परेशान है। हालांकि व्यापार मंडल ने अपने प्रयासों से यहां एक पर्यावरण मित्र की तैनाती की है, लेकिन इस बड़े क्षेत्र के लिए यह नाकाफी है। 

स्ट्रीट लाइटें पड़ी हैं बंद
कौसानी बाजार, अनाशक्ति आश्रम मार्ग समेत कई अन्य इलाकों में स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। पथ प्रकाश व्यवस्था चरमराने से सैलानियों और राहगीरों को कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैैं। क्षेत्र के लोगों ने यूपीसीएल को कई बार स्ट्रीट लाइटें चालू करने की मांग कर दी है, लेकिन विभाग इसे अपना काम नहीं बताकर पल्ला झाड़ता है। 

सड़कें जकड़ी भवन निर्माण सामग्री से 
अनाशक्ति और अन्य स्थानों पर लोगों ने सड़क के किनारे भवन निर्माण के काम आने वाले ईंट, रेता और लोहे की सरिया रखी है। इससे सड़कें सिकुड़ गई हैं। निर्माण सामग्री के ढेरों के कारण वाहनों, पर्यटकों और अन्य लोगों को आने जाने में कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। जहां जहां सड़कें सिकुड़ी हैं वहां दुर्घटना होने की भी आशंका बनी है। 
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