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लॉकडाउन से गांधी आश्रम को 30 लाख का नुकसान

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चनौदा गांधी आश्रम में खाली पड़ी मशीनें। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन से गांधी आश्रम को करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। इस कारण गांधी आश्रम से जुड़े करीब 300 कामगारों का रोजगार छिन गया है। कुमाऊं के छह जिलों में करीब 25 बिक्री भंडार हैं। इनमें से कुछ दुकानें ही खुली हैं। वहां बचाखुचा सामान बेचा जा रहा है।
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कुमाऊं में प्रधान कार्यालय चनौदा (अल्मोड़ा) से गांधी आश्रम संचालित किए जाते हैं। चनौदा (कौसानी), बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़, यूएस नगर, नैनीताल के गांधी आश्रमों के उत्पादन केंद्र लॉकडाउन के बाद 25 मार्च से बंद हैं। गांधी आश्रम चनौदा (अल्मोड़ा) के सचिव सोबन सिंह बिष्ट ने बताया कि गांधी आश्रम के उत्पादन केंद्र और बिक्री भंडार बंद होने से यूनिट को करीब 30 लाख का नुकसान हो चुका है। इससे जुड़े करीब 300 कामगार बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने बताया कि खादी ग्रामोद्योग से प्रमाणित गांधी आश्रम में करीब 80 स्थायी कर्मचारी हैं। काम बंद होने से कारण पिछले तीन माह से इन्हें वेतन नहीं मिला है। खादी उत्पादन केंद्र चनौदा, अल्मोड़ा, बागेश्वर, बनलेख, धरमघर में काम ठप है। लॉकडाउन के कारण उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री नहीं आ पा रही है। इस कारण कताई, बुनाई आदि की मशीनें भी बंद हैं। इसका सीधा प्रभाव कर्मचारियों पर पड़ रहा है। गांधी आश्रमों में पहले से रखा सामान बेचा जा रहा है लेकिन बाहर से सामान न आ पाने के कारण उत्पादन बंद है।
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