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नाॅमिनी को 3.10 लाख का भुगतान करेगी एलआईसी

Wed, 08 Jul 2015 01:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो/बागेश्वर
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जिला  उपभोक्ता फोरम के आदेश पर भारतीय जीवन बीमा निगम की स्थानीय शाखा एक महिला को उसके मृतक पति की पालिसियों पर तीन लाख की बीमित राशि और दस हजार रुपय का अतिरिक्त भुगतान करेगी।
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निगम ने यह कहकर क्लेम देने से इनकार कर दिया  था कि संबधित व्यक्ति ने यह पालिसियां लेते वक्त पुरानी पालिसियों का उल्लेख नहीं किया था।

कपकोट विकास खंड के गेडेरा गांव निवासी दरबान सिंह ने एलआइसी की बागेश्वर शाखा से अलग-अलग समय में अलग-अलग राशि के सात बीमे कराए थे।

गत वर्ष 11 फरवरी को उनकी हत्या हो गई। इसके बाद नामिनी परिजनों ने बीमा राशि के भुगतान के लिए दावा पेश किया।

एलआईसी ने पहले की तीन पालिसियों का भुगतान किया। बाद की चार पालिसियों जिसमें नामिनी उनकी पत्नी खष्टी देवी हैं। यह पालिसियां क्रमश: एक लाख, पचास हजार, पचास हजार और एक लाख की हैं, का भुगतान करने से इनकार कर दिया।

एलआइसी का कहना था कि बाद के चार बीमे कराते वक्त बीमा धारक ने पहले की दो पालिसियों का उल्लेख बीमा प्रस्तावों में नहीं किया।

बीमा के नियमों के अनुसार यह गलत है। बीमा धारक ने तथ्यों को छिपाकर नई पालिसियां ली हैं। इसलिए कंपनी इन पालिसियों के दावों का भुगतान करने को बाध्य नहीं है।
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जीवन बीमा निगम के इस रुख के बाद खष्टी देवी ने जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया। इस मामले में दोनों पक्षों ने तथ्य पेश किए। एलआईसी ने पूर्व की पालिसियों को छिपाने की बात रखी।

तीन जुलाई को जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जिला जज डा. जीके शर्मा, सदस्य मीना फर्त्याल और संजय लोहनी ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि वर्तमान समय में केंद्र सरकार के अन्य विभागों की तरह एलआईसी में भी अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण की व्यवस्था है, जहां बीमा पालिसियों का पूरा विवरण रहता है।

कंपनी इससे लाभ कमाती है, बीमा पालिसियों को बीमाधारक द्वारा छिपाए जाने की बात तर्कसंगत नहीं है। इसके लिए बीमाधारक दोषी नहीं है। फोरम ने एलआईसी को आदेश दिया है कि वह खष्टी देवी को चार पालिसियों का तीन लाख का भुगतान एक माह के अंदर कर दे।

इसमें देरी होने पर खष्टी देवी को नौ प्रतिशत सालाना ब्याज वसूलने का भी अधिकार होगा। इसके अलावा मानसिक कष्ट के लिए पांच हजार और वाद के लिए भी पांच हजार रुपये कंपनी उन्हें चुकता करेगी।
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