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मुर्गी खाने आया तेंदुआ पिंजरे में कैद

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दीपक सिंह परिचर्चा के लिए बागेश्वर में तेंदुआ देखने पहुंचे। - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। शहर से सटे द्यांगड़ गांव में मुर्गी खाने आई मादा तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गई। खबर फैलते ही आसपास के गांव के लोग भी मौके पर जमा हो गए। भीड़ कंट्रोल करने के बाद वन कर्मियों ने तेंदुए को वन परिसर पहुंचाया। पशुपालन विभाग के डॉक्टरों ने उसका परीक्षण कर उसे जंगल में छोड़ दिया।
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पिछले हफ्ते द्यांगड़ में तेंदुआ आ गया। ग्रामीणों के अनुसार एक महिला पर उसने हमले का प्रयास भी किया था। ग्रामीणों की मांग पर वनकर्मियों ने पिछले गांव में पिंजरा लगाया था। इसमें एक मुर्गी रखी गई थी। बुधवार रात मुर्गी खाने आया तेंदुआ पिंजरे में फंस गया।
तेंदुआ पकड़े जाने की खबर पर मौके पर जमा भीड़ को संभालने में वन विभाग के कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान कुछ लोग तेंदुआ को आदमखोर बताने लगे। लोगों का बढ़ता आक्रोश और भीड़ के चलते पिंजरे में कैद आदमखोर खुद को नुकसान न पहुंचा ले, इस वजह से वनकर्मियों ने पिंजरे को कपड़े और तिरपाल से ढक दिया। बाद में पिंजरे को सुरक्षित वन विभाग के कार्यालय ले जाया गया, जहां पशुपालन विभाग के डॉक्टरों ने उसका परीक्षण किया।
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ग्रामीणों ने वनाधिकारियों से मांगे तेंदुआ छोड़ने के सबूत
बागेश्वर। युवक कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अन्य ग्रामीणों ने रेंज कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया गया कि दो साल पहले तेंदुए ने एक बच्चे को मार दिया था। उससे पहले भी गांव में एक तेंदुआ पकड़ा गया था। इस पर ग्रामीणों ने शक जताया कि पहले पकड़े जा चुके तेंदुए ने ही उस बच्चे को मारा था। इसलिए दोबारा ऐसी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इस शंका का समाधान करवाने के लिए ग्रामीणों ने वनाधिकारियों से इस तेंदुए को छोड़ने वाले स्थल की सूचना फोटो, वीडियो समेत दिलाने की मांग की है। ज्ञापन में गोविंद कठायत, सूर्यभानु दफौटी, दर्शन कठायत, प्रकाश चंद्र, बसंत कुमार आदि के हस्ताक्षर थे।
दो साल पहले दीपावली की पूर्व संध्या पर तेंदुए ने नाती को मार दिया। सदमे से अब तक नहीं उबर सकी हूं। अब गांव में दोबारा तेंदुए की दहशत है। इस कारण परिजन समेत सभी ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
- मधुली देवी
लोग जंगली जानवरों से परेशान हैं। सरकार जंगलों को बचा नहीं पा रही लेकिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम बनाकर ग्रामीणों को मरवाने का पूरा बंदोबस्त किया है। इसका विरोध करने पर केस झेलना पड़ता है।
- रमेश भंडारी
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तेंदुए ने दो बच्चों को मारा था तो वन विभाग के खिलाफ आंदोलन किया था। तब प्रशासन ने ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। यह मामला अभी नहीं निपट सका है और आए दिन नोटिस आ रहे हैं।
- गोविंद कठायत
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वनाधिकारियों को यहां तेंदुआ आने की सूचना पर विश्वास नहीं था। कई मिन्नतों के बाद पिछले हफ्ते पिंजरा लगाया। तेंदुआ पकड़े जाने के बाद भी ग्रामीणों, अधिकारियों को सावधानी बरतनी चाहिए।
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- दीपक सिंह
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