कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से धनिया की पंत हरीतिमा प्रजाति पर प्रक्षेत्र दिवस आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नवल किशोर सिंह ने किया। उन्होंने कृषकों को सलाह दी कि वह धनिया की खेती को अपने परंपरागत फसल चक्र में शामिल करें। धनिया बीज के उत्पादन से अपनी आजीविका में सुधार लाने को कहा।
कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर की ओर से डालखोलिया गांव में आयोजित गोष्ठी में प्रभारी अधिकारी डॉ. सिंह ने कहा कि पहाड़ की अनुकूल आबोहवा में जैविक कृषि के उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग के साथ ही कीमत भी अच्छी मिल रही है।
कृषकों को कृषि में वैैैज्ञानिक आधार अपनाने को कहा। पादप सुरक्षा विशेषज्ञ हरीश जोशी ने बताया पंत हरीतिमा धनिया में लगने वाली गौल रोग गनिया के लिए रोगरोधी किस्म है। वैज्ञानिक खेती के विषय में विस्तारपूर्वक बताते हुए कहा कि अणिक कीटनाशी से उपचारित धनिया के प्रयोग से शरीर में होने वाले कुप्रभाव से बचाव के लिए धनिया फसल में कम से कम कीटनाशियों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
कृषकों को क्षेत्र में लगी फसल का अवलोकन कराया गया। प्रभारी अधिकारी डा. सिंह ने कृषकों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण कार्ड वितरित किए। वहां ग्राम प्रधान ललिता आर्या, भुवन जोशी, विशन दत्त, गौरी दत्त, राधा बल्लभ जोशी समेत कई कृषक मौजूद थे।