कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में नवजात बछड़ों का वैज्ञानिक प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन हुआ। केंद्र के प्रभारी डॉ. नवल किशोर सिंह ने कहा कि मौसम में आए बदलाव से कृषि में नुकसान की भरपाई का एकमात्र विकल्प पशुपालन व्यवसाय से अर्जित आय से की जा सकती है।
केवीके काफलीगैर के सभागार में केंद्र प्रभारी डॉ. सिंह ने कहा कि नवजात बछड़े ही कल के दुधारू पशु होंगे। इसलिए उनके सकुशल रखरखाव और खानपान पर खास ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने बछड़ों की नाभी रज्जू में संक्रमण निमोनिया, दस्त आदि के मौसमी बीमारियों से बचाव के उपायों के बारे में बताया।
बछड़ों को खीस पिलाने की विधि, खिलाने की मात्रा के बारे में बताया। विशेषज्ञ पादप हरीश जोशी, मेदनी प्रताप सिंह ने किसानों को प्रक्षेत्र का भ्रमण कराकर कीट, फसल प्रबंधन के बारे में बताया। इस कार्य में निधि भारती, जानकी मेहता ने सहयोग दिया।
गोष्ठी में किसानों ने जिला मुख्यालय पर पिछले दिनों संपन्न उत्तरायणी मेले में लगी विकास प्रदर्शनी में केवीके की प्रदर्शनी को द्वितीय पुरष्कार मिलने पर खुशी जताई गई। इसके लिए किसानों ने केंद्र के अधिकारियों, कर्मचारियों को बधाई दी। वहां मोहन सिंह रौतेला, हयात सिंह, शेर सिंह, अनिल कुमार, आनंद प्रसाद आदि थे।