कमस्यार घाटी के पशु पालकों की सुविधा के लिए खातीगांव में स्थापित पशु सेवा केंद्र में पशुधन प्रसार अधिकारी न होने से भवन में पिछले सात साल से ताला लगा है। केंद्र में कोई तैनाती नहीं होने के कारण क्षेत्र के पशुपालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशु पालकों ने रिक्त पदों को भरने के लिए अब तक कई बार मांग कर दी है। लेकिन उनकी आज तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। भवन के लावारिस हालत में छोड़े जाने से अराजक तत्व भवन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। नाराज पशु पालकों ने अब इस मामले को चुनावी मुद्दा बना लिया है।
कमस्यार घाटी में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए दशकों पहले खातीगांव में पशु सेवा केंद्र की स्थापना की थी। इस केंद्र से बगराटी, भंडारीगांव, खातीगांव, देवतोली, नरगोली, औलानी, कपूरी, खाड़ी, अठपैसिया, पस्ट्यारी, पैठाण, धौलियापाटा, देवलेत, तुषरेड़ा, ठांगा, गढ़ौली, भैंसूड़ी, रावतसेरा और भंडारीसेरा आदि गांवों के पशु पालकों को लाभ मिलता था। पशु पालकों के उत्साह को देखते हुए 2016 में लाखों रुपए की लागत से भवन का निर्माण किया गया था। वर्ष 2010 में यहां तैनात पशुधन प्रसार अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए थे। तब से यहां उनका प्रतिस्थानी नहीं आया। पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं होने से पशुपालकों को उन्नत नस्ल के गाय और भैंसों की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
पशुओं में बीमारी होने पर उनका भी उपचार नहीं हो पाता है। इसके लिए पशुपालकों को जिला मुख्यालय आना पड़ता है। पशु पालक राम सिंह, प्रेेम सिंह, देव सिंह, देबुली देवी, कमला देवी और जैंत सिंह का कहना है उन्होंने शासन, पशु पालन विभाग और जनप्रतिनिधियों से पशुधन प्रसार अधिकारी की तैनाती के लिए कई बार कहा लेकिन आज तक तक उनकी किसी ने भी नहीं सुनी है। इधर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. उदय शंकर ने बताया कि उन्होंने पशुधन प्रसार अधिकारी समेत अन्य स्टाफ की तैनाती कि लिए निदेशालय को पत्र लिखा है।