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अब लीती की धरती भी उगलेगी लाल सोना

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केसर का फूल। - फोटो : ALMORA
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बागेश्वर। उच्च हिमालयी क्षेत्र के लीती (कपकोट) में लाल सोने (केसर) की खेती का प्रयोग सफल होता दिख रहा है। लीती में केशर के पौधों में फूल खिल गए हैं। केसर के पौधों में फूल खिलने से काश्तकारों का चेहरा भी खिल गया है।
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विकेंद्रीकृत जलागम परियोजना (ग्राम्या) के सहयोग से कपकोट विकासखंड के लीती और खलझूनी में प्रयोग के तौर पर इस बार केसर की खेती की जा रही है। लीती के गोविंद सिंह कोरंगा ने बीते सितंबर में डेढ़ नाली के खेतों में केसर के 30 किलो बल्बों का रोपण किया है। खलझूनी में भी दो काश्तकार केसर की खेती में हाथ आजमा रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में लीती और खलझूनी में केसर के बल्बों ने पौधों का आकार ले लिया था। अब केसर के पौधों में फूल खिल गए हैं।
गोविंद ने बताया कि अभी कुछ ही पौधों में फूल खिले हैं। उम्मीद है कि जल्द ही सभी पौधों में फूल खिल जाएंगे। मार्च-अप्रैल में केसर की पहली पैदावार हो जाएगी। कहते हैं कि परिणाम अच्छा रहा तो अगले साल से बड़ी मात्रा में केसर की खेती करेंगे।
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एक लाख से दो लाख रुपये किलो बिकता है केसर
भारत में केसर की सबसे बड़ी मंडी खारी बावली नई दिल्ली है। केसर की कीमत क्वालिटी के हिसाब से तय होती है। केसर एक लाख से दो रुपये किलो बिकता है। केसर के बीज अमेजन समेत तमाम कंपनियां ऑनलाइन भी भेजती हैं।
कश्मीर के साथ ही देश के विभिन्न इलाकों में केसर उत्पादन से किसान आत्मनिर्भर बन गए हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सीमांत के किसानों को केसर की खेती से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की योजना बनाई। लीती और खलझूनी में केसर की खेती का प्रयोग सफल होता दिख रहा है। अगले साल अन्य गांवों में भी केसर की खेती कराई जाएगी। - एलएस रावत उप परियोजना प्रबंधक ग्राम्या बागेश्वर
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