बागेश्वर में धरना देते जिपं उपाध्यक्ष और सदस्य। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जिला पंचायत उपाध्यक्ष और आठ जिपं सदस्यों के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित दो सदस्यीय जांच समिति आरोपों की जांच कर रही है। जिपं उपाध्यक्ष और असंतुष्ट सदस्यों ने कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट जाने की भी चेतावनी दी है।
बीते 15 जून से जिला पंचायत परिसर में धरना दे रहे जिपं उपाध्यक्ष नवीन परिहार, जिपं सदस्य हरीश ऐठानी, सुरेंद्र खेतवाल, वंदना ऐठानी, गोपा धपोला, इंदिरा परिहार, पूजा आर्या, रूपा कोरंगा और रेखा देवी का आरोप है कि जिपं अध्यक्ष विवेकाधीन कोष के नाम पर 55 फीसदी बजट अपने पास रख ले रही हैं। जिला पंचायत में नियुक्तियों में गंभीर अनियमितता की गई है। एक कर्मचारी के स्थान पर तीन की पदोन्नति कर दी गई है। संविदा समाप्त होने के बाद भी कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। जिला पंचायत के चालकों से वाहन नहीं चलवाकर संविदा पर कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से वाहन चलवाए जा रहे हैं। नियमों के विपरीत चालक का भत्ता दिया जा रहा है। इन लोगों ने जिपं अध्यक्ष पर पंचायतीराज एक्ट से छेड़छाड़ करने का भी आरोप लगाया है।
इस मामले में सदस्यों ने बीते मंगलवार को पंचायतीराज निदेशक, सचिव, डीजीपी को पत्र प्रेषित किया था। यह लोग एसपी को शिकायतीपत्र देकर पंचायतीराज एक्ट से छेड़छाड़ के मामले में कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। मुख्य विकास अधिकारी डीडी पंत की अध्यक्षता में गठित समिति ने जांच शुरू कर दी है। समिति में कोषाधिकारी पूरन चंद्र उप्रेती शामिल हैं।
जिपं उपाध्यक्ष और सदस्यों के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। जिला पंचायत से पत्रावलियां तलब की है। जल्द ही जांच पूरी कर ली जाएगी। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर अगला कदम उठाया जाएगा। - डीडी पंत मुख्य विकास अधिकारी बागेश्वर