एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के प्रभागीय प्रबंधन इकाई बागेश्वर की ओर से कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर में आयोजित तीन दिनी बेमौसमी सब्जी उत्पादन प्रशिक्षण के दौरान किसानों को कई जानकारियां दी गई। केंद्र के प्रबंधक नवल किशोर सिंह ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में उन्नत कृषि तकनीक अपनाकर, पादप रोग और कीटों के उचित प्रबंधन से ग्रामीण कृषक अपनी आजीविका संवर्धन की दिशा में सार्थक पहल कर सकते हैं।
केवीके सभागार में एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के प्रभागीय परियोजना प्रबंधक धर्मेंद्र पांडे ने कहा कि जिले की स्वायत्त सहकारिताओं के जरिए संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि क्षेत्र में सब्जी, डेयरी व्यवसाय में असीम संभावनाएं हैं। पादप रोग विशेषज्ञ हरीश जोशी ने किसानों को कीटों से पौधों की सुरक्षा, कीट प्रबंधन और पौधों में लगने वाले रोग, पहचान और उसके उपचार की जानकारी दी।
संस्थान के संदर्भ व्यक्ति डॉ. मेदनी प्रताप सिंह ने जैविक कीटनाशकों और रोगों से पौधों के बचाव की जानकारी दी। एकीकृत आजीविका परियोजना के सहायक प्रबंधक प्रकाश पाठक ने कृषकों को परंपरागत कृषि से ऊपर उठकर खेती के वैज्ञानिक तरीकों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर केंद्र की कार्यक्रम संचालक निधि साह, आजीविका परियोजना के सहायक वीरेंद्र गुंसाई, विशन लुम्याल, गोविंद प्रसाद, तकीनीकी संस्था भुवनेश्वरी महिला आश्रम के रमेश आर्या समेत गरुड़ ब्लॉक के 20 सब्जी उत्पादक और सदस्य मौजूद थे।