गरुड़ के सेवानिवृत शिक्षक गोपाल दत्त पाठक
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शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। प्रदेश सरकार भी इसके लिए प्रयास कर रही है, पर प्रदेश सरकार की यह कोशिश पहाड़ पर चढ़ते-चढ़ते हांफने लगी है। यही कारण है कि कई स्कूलों को सिर्फ एक शिक्षक के सहारे बच्चों का भविष्य संवारने के लिए छोड़ दिया गया है। ऐसे में राजकीय इंटर कॉलेज बंतोली से संस्कृत प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त शिक्षक गोपाल दत्त पाठक ने सरकार को आईना दिखाने का काम किया है। प्राथमिक विद्यालय गढ़सेर में शिक्षक की तैनाती की मांग पूरा नहीं होने पर गांव के ही निवासी पाठक ने 70 साल की उम्र में बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा खुद उठा लिया। बीमार रहने के बाद भी पाठक जी रोज स्कूल जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
बता दें कि प्राथमिक विद्यालय गढ़सेर में वर्तमान में 77 बच्चे अध्ययनरत हैं। स्कूल के हेड टीचर प्रेम दोसाद ने बताया कि मानक के लिहाज से स्कूल में तीन शिक्षक तैनात होने चाहिए, लेकिन स्कूल में मात्र एक शिक्षक ही है। इसी स्कूल में सेवानिवृत्त शिक्षक गोपाल दत्त पाठक का पोता और जूनियर हाइस्कूल पिंगलों की सहायक अध्यापिका उषा पाठक पुत्र उद्धव भी कक्षा चार में पढ़ता है। पाठक जी रोजाना पोते को स्कूल छोड़ने जाते थे, लेकिन स्कूल में एक ही शिक्षक होने का उन्हें हमेशा दुख सताता था। कई अभिभावक विधायक से लेकर सीएम दरबार तक इस संबंध में गुहार लगा चुके थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद तो पाठक जी ने खुद ही चॉक उठा ली और स्कूल में पढ़ाने लगे। अब वह रोजाना पोते के साथ स्कूल जाते हैं और बच्चों को पढ़ाते हैं। हालांकि उनका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता, लेकिन फिर भी बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं।
इधर, बीसूका के पूर्व जिला उपाध्यक्ष एवं गढ़सेर गांव निवासी भुवन पाठक ने बताया कि स्कूल में पिछले वर्ष छात्र संख्या 52 थी, जो बढ़कर 77 हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार की गलत स्थानांतरण नीति के चलते अधिक छात्र संख्या वाले गढ़सेर प्राथमिक सहित कई प्राथमिक स्कूल सालों से एकमात्र शिक्षक के हवाले हैं।