बागेश्वर। बागनाथ नगरी के सरयू पुल से ठाकुरद्वारा वार्ड शुरू होता है। इस सड़क में पहाड़ी और नदी दोनों ओर भवन बने हैं। सरयू नदी में गंदगी जाने के कारण नगरपालिका द्वारा बनाए गए सार्वजनिक शौचालय को एक वर्ष पूर्व बंद कर दिया गया है लेकिन पतित पावनी सरयू फिर भी मैल से मुक्त नहीं हो सकी है। पुल से करीब एक किमी की दूरी तक नदी में देखने पर कचरा ही कचरा बिखरा नजर आता है। आबादी से निकलने वाले कई नालों की गंदगी भी सरयू में ही समा जाती है।
सरयू को कूड़ा मुक्त करने के अभियान के तहत अमर उजाला ने शनिवार को ठाकुरद्वारा वार्ड में जाकर लोगों से बातचीत की। इस दौरान लोगों ने मौजूदा व्यवस्थाओं को नाकाफी बताते हुए संसाधन बढ़ाने का सुझाव दिया। लोगों का कहना था कि वह चाहते हैं कि जिस सरयू पर लाखों की आस्था है वह मैली न हो लेकिन कूड़ेदान, शौचालय, नाली निकासी का प्रबंध जैसी व्यवस्थाएं न होने तक कूड़े की समस्या से निपटना आसान नहीं होगा।
ठाकुरद्वारा वार्ड की सभासद तारा साह ने कहा कि अमर उजाला का अभियान सराहनीय है। उनका प्रयास मोहल्ले को स्वच्छ रखना है। उन्होंने वार्ड में शौचालय और कूड़ेदानों की व्यवस्था के लिए प्रयासरत होने की बात कही। कहा कि बागेश्वर का धार्मिक रूप से विशेष महत्व है। शासन-प्रशासन को भी बागेश्वर नगर और यहां की नदियों की सफाई के लिए सोचना चाहिए।
भावना पांडे ने बताया कि वार्ड में सफाई की व्यवस्था संतोषजनक है, लेकिन लोगों के लिए सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं है। सड़कों और गलियों में कूड़ा-करकट रोकने के लिए ठोस उपाय होने चाहिए ताकि यह कूड़ा नदी में न गिरे। नदी की स्वच्छता के लिए प्रशासन को भी उपाय करने होंगे, लेकिन उससे पहले व्यवस्थाएं होना जरूरी है।
केशवानंद जोशी ने बताया कि वार्ड में पालिका की ओर से कूड़ेदान लगाए हैं, लेकिन अधिकांश लोग कूड़ेदान में कूड़ा न डालकर सड़कों पर फेंक देते हैं। ऐसे लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। प्रशासन को भी इसके लिए नियम बनाने होंगे। शहर और सरयू नदी को साफ रखने के लिए सभी को गंभीरता से प्रयास करने की जरूरत है।
बागेश्वर। बागेश्वर नगर में सरयू के दोनों तटों पर गंदगी फैली है। कूड़ा-करकट और प्लास्टिक से लेकर खाद्य पदार्थों के रेपर तक नदी में ही हैं। लोगों से जब पूछा जाता है तो उनका कहना होता है कि वह अपने घरों का कूड़ा कूड़ेदानों में डालते हैं। नगरपालिका द्वारा नियमित सफाई अभियान चलाने की बात कही जाती है। ऐसे में अहम सवाल यह है कि जब सभी अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं तो फिर सरयू में गंदगी का गुनहगार कौन है।