उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को सुविधा देने के न जाने कितने दावे सरकार और जनप्रतिनिधि करते रहते हैं, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और बयां कर रही है।
छात्रावास विद्यार्थी के लिए एक ऐसा स्थान है, जहां वह कॉलेज में पढ़ाई करने के बाद यहां आकर सुकून से विषय और अपने बारे में चिंतन करता है, लेकिन पीजी कॉलेज बागेश्वर के सामान्य वर्ग के छात्रावास में सुकून और स्वच्छता दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती।
छात्र मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। पूरा छात्रावास बीड़ी, सिगरेट, गुटखे की गंदगी से भरा है। शौचालयों का बुरा हाल है। छात्रों का कहना है कि कई बार कॉलेज प्रशासन, डीएम आदि को समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। छात्र खंडहरनुमा छात्रावास में रहने को मजबूर है।
पीजी कॉलेज बागेश्वर में सामा, चेटाबगड़, सूपी आदि दूरदराज के गांवों के हजारों बच्चे पढ़ाई केे लिए आते है। यहां सामान्य और एससी-एसटी छात्रों के लिए दो छात्रावास हैं। सामान्य जाती के छात्रों के लिए बने छात्रावास का निर्माण 1974 में हुआ था।
यहां के खाली कमरों में ताले तक नहीं लगे हैं। सारे कमरे खुले पड़े हैं। कुछ कमरे तो छात्रों द्वारा शौचालय के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे है। शौचालयों का हाल ऐसा की कोई अंदर झांक भी नहीं सकता। छात्रावास में सफाई के लिए कॉलेज प्रशासन की तरफ से कोई सफाई कर्मचारी नहीं है।
यहां पसरी गंदगी का मंजर ऐसा है कि कोई यहां झांकने तक न आए, लेकिन क्या करें दूर-दराज से पढ़ाई को आए के बच्चे इस नरक में रहने को मजबूर हैं। कॉलेज प्रशासन यहां कभी देखने तक नहीं आता। यहां एक गार्ड तक की व्यवस्था नहीं है।
कभी भी कोई भी हॉस्टल में घुस आता है। कमरों में पंखे तक नहीं हैं। छात्रसंघ अध्यक्ष दीपक घस्याल का कहना है कि छात्रावास के विषय में डीएम रंजना को बताया था वह निरीक्षण के लिए आई थीं। कॉलेज, छात्रावास में जल्द ही सीसीटीवी लगाए जाएंगे।
पेयजल मंत्री ने टीम भेजी है। जल्द ही पानी की व्यवस्था की जाएगी। इस बार एनएसयूआई की तरफ से अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने वाले नीरज सिंह ने कहा कि हॉस्टल की दशा सुधारनी है।
यही हाल एससी-एसटी छात्रवास का भी है। यहां कमरों में पंखे तो हैं पर चलते नहीं। छात्रवास में करीब 52 बच्चे हैं, लेकिन शौचालय सिर्फ दो हैं। छात्रों के लिए कंप्यूटर लैब, कोचिंग कक्ष, स्पोर्ट्स कक्ष और लाइब्रेरी बनी है पर न तो यहां से खेलने का कोई सामान मिलता है न किताबें।
छात्रावास रहने लायक नहीं : वार्डन
बागेश्वार। छात्रवास की जर्जर अवस्था पर जब प्रधानाचार्य एससी पंत से फोन द्वारा पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे जानकारी छात्रावास के वार्डन देंगे और उन्होंने फोन काट दिया। वार्डन एसएस धपोला ने बताया कि छात्रावास के रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं है।
सरकार जब प्रस्ताव मांगती है तो भेज देते है। सरकार की तरफ से कोई बजट नहीं आता। कहा कि उन्हें वार्डन का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। उनके अनुसार छात्रावास रहने लायक नहीं है।
कॉलेज प्रशासन जब प्रस्ताव देगा तो कुछ किया जाएगा। कॉलेज की तरफ से कोई प्रस्ताव नहीं आया है। कॉलेज प्रशासन उच्च शिक्षा विभाग के पास जा सकता है। रूसा के तहत पैसा ले सकते है। वहां पैसों की कमी नहीं है।
- चंदन राम दास, विधायक।