बागेश्वर, पिथौरागढ़ जिलों की सीमा पर बसा धरमघर समस्याओं का घर बनकर रह गया है। हालात यह हैं कि प्रमुख पर्यटन स्थल होने के बावजूद यहां पर सुविधाएं नगण्य हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए स्वीकृत पर्यटक आवास गृह नहीं बन सका है।
पंपिंग योजना नहीं बनने से लोगों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा है। बैंकिंग सुविधाओं का भी बुरा हाल है। लोगों को एटीएम सुविधा के लिए 20 किमी दूर बेड़ीनाग या 50 किमी दूर बागेश्वर जाना पड़ता है।
गंगा सिंह पांगती ने बताया कि धरमघर क्षेत्र में पेयजल की समस्या गंभीर है। पेयजल समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2014 में गनेठा से धरमघर के लिए पंपिंग योजना स्वीकृत हुई थी लेकिन सर्वे का कार्य ही पूरा हो पाया है। इस पंपिंग योजना का निर्माण शीघ्र करना चाहिए ताकि लोगों को पेयजल संकट से न जूझना पड़े।
होशियार सिंह महर का कहना है कि धरमघर में गैस गोदाम नहीं है। वर्ष 2013 में गैस गोदाम की घोषणा हुई थी, लेकिन इसके निर्माण को लेकर कोई पहल नहीं हुई है। 2008 में स्वीकृत धरमघर-छिप्चिया मोटर मार्ग भी नहीं बन सका है। सरकार ने गैस, सड़क की सुविधा शीघ्र उपलब्ध करानी चाहिए।
राजेंद्र सिंह कार्की राज्य आंदोलनकारी ने बताया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पूर्व में धरमघर में पर्यटक आवास गृह स्वीकृत हुआ था लेकिन बना नहीं। बाजार की सफाई व्यवस्था भी चौपट है। बाजार में कूड़ा बिखरा रहता है। पर्यटन व्यवसाय को देखते हुए सरकार को सुविधाएं बढ़ाने के लिए पहल करनी होगी।
देव सिंह कोरंगा का कहना है कि धरमघर दो जिलों की सीमा पर है लेकिन सुविधाएं कुछ भी नहीं हैं। उन्होंने बताया कि धरमघर में 108 नंबर की एंबुलेंस तैनात की जानी चाहिए। यहां वाहन रहने से दोनों जिलों के लोगों को सुविधा मिल सकेगी। क्षेत्र के विकास के लिए धरमघर को उप तहसील का दर्जा दिया जाना चाहिए।
उमा पंचपाल, उपाध्यक्ष ग्राम प्रधान संगठन बेड़ीनाग का कहना है कि क्षेत्र में एटीएम और पेयजल की समस्या मुख्य है। नागिलागांव में 25 साल पुरानी पेयजल योजना से जलापूर्ति हो रही है, जबकि इसके पाइप गल चुके हैं। जिस कारण लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। कई स्थानों पर बिजली के तार झूल रहे हैं। स्कूल में बिजली की व्यवस्था नहीं है।
मोहन सिंह कोरंगा ने बताया कि क्षेत्र में सड़कों का अभाव प्रमुख समस्या है। घुरड़िया बैंड से खड़लेख भनार मोटर मार्ग में कार्य करने की जरूरत है। सड़कें न होने से लोगों को मीलों की दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है। जूनियर हाईस्कूल एकल शिक्षक के सहारे चल रहा है। सरकार को शिक्षा, सड़क की सुविधा बढ़ानी चाहिए।