बागेश्वर के बागनाथ मंदिर परिसर में होली गायन करते होल्यार।
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होली की चतुर्दशी के दिन बाबा बागनाथ का धाम ढोलक, मंजीरे की थाप और खड़ी होली के गीतों के स्वर से गुंजायमान रहा। 30 से अधिक गांवों के होल्यारों की टोली ने मंदिर में सामूहिक होली गायन किया। करीब तीन घंटे तक मंदिर परिसर में होली गायन चलता रहा। इस दौरान पूरा नगर होली के रंग में डूबा रहा। सोमवार को बागनाथ मंदिर में करीब एक बजे से होल्यारों का जुटना शुरू हुआ। परंपरा के अनुसार सबसे पहले आरे और पंद्रहपाली के होल्यारों की टोली ने मंदिर में प्रवेश किया।
होल्यारों ने भगवान शिव को अबीर-गुलाल अर्पित कर होली गायन किया। उनके गायन के बाद मनकोट, द्यांगण, खोली, बहुली, अमतोड़ा, स्यूनी, मजबे, चामी, क्वैराली, सात, रतबे, जौलकांडे, भयेड़ी, मजबे, डुंगरगांव समेत क्षेत्र के अन्य गांवों से होल्यार चौक बाजार में एकत्र हुए। यहां से ढोलक-मंजीरे की धुन पर नाचते-गाते होल्यार बागनाथ मंदिर को रवाना हुए। तमाम गांवों के होल्यार बारी-बारी से मंदिर परिसर में पहुंचे। मंदिर में प्रवेश कर होल्यारों ने भगवान शिव को अबीर-गुलाल चढ़ाया। मंदिर परिसर में होल्यारों ने हां जी शंभो तुम क्यों न खेले होरी लला..., शिव के मन माही बसे काशी..., मथुरा के ठाकुर हो हो... आदि होली गीतों का गायन किया। करीब दो घंटे तक मंदिर में होली गायन का सिलसिला चला। होली गायन के दौरान मंदिर में किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।