खान-पान और बदलती जीवन शैली ने पहाड़ के लोगों को भी दिल का रोगी बना दिया है। साफ हवा-पानी होने से स्वास्थ्य के लिए मुफीद माने जाने वाले पहाड़ में भी अब मैदान के बराबर दिल के मरीज हो रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बागेश्वर जैसे छोटे से जिले में भी प्रतिदिन 10 से 15 हृदय की बीमारी से संबंधित मरीज जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
डॉक्टरों की मानें तो एक दशक पूर्व तक पहाड़ पर दिल की बीमारी से संबंधित बहुत कम मरीज जांच के लिए आते थे। लेकिन, अब यहां के हालात भी पूरी तरह से मैदान की तरह हो गए हैं। साफ हवा और पानी के बावजूद लगातार हृदय रोगियों की संख्या बढ़ रही है।
महज 2.60 लाख की आबादी वाले बागेश्वर जिले की यदि बात की जाए तो यहां पर प्रतिदिन हृदय रोगी जांच के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं, यानी कि एक माह में 300 और एक साल में 3600 मरीज। कई ऐसे भी मरीज हैं, जो जांच के लिए सीधे हायर सेंटर चले जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह आंकड़े चिंताजनक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पहले पहाड़ के लोग पैदल चलते थे। अब यहां भी रहन-सहन में बदलाव आया है।
आरामतलब जीवन शैली और खानपान के कारण पहाड़ पर दिल के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। युवा खानपान के साथ ही धूम्रपान के कारण हृदय रोगों की चपेट में आ रहे हैं। दिल का दौरा पड़ने के मामले इसी के कारण बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार लगातार छाती के बाईं ओर दर्द होने पर हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। ईसीजी सहित हृदय की जांच करानी चाहिए।
हृदय रोग विशेषज्ञ का पद खाली
करीब ढाई लाख की आबादी के लिए खोले गए बागेश्वर जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद खाली है। जिला अस्पताल में फिजीशियन ईसीजी करने के बाद मरीजों को दवाएं या सलाह देते हैं। सीएमएस डॉ. बसंत ने बताया कि हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए निदेशालय को पत्र भेजा गया है।