कुछ लोगों में जीवन में कुछ अलग ही करने का जुनून होता है। इनमें से एक हैं नगर पंचायत कपकोट के ऐठाण निवासी हरिमोहन ऐठानी।
उनका नाम जादुई पहेली के जरिए इंटरनेशनल वंडर बुक ऑफ रिकार्ड और यूनिवर्सल रिकार्ड्स फोरम में दर्ज होने के बाद अब लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में भी दर्ज हो गया है।
गणित के धुरंधर ऐठानी ने 53 दिन में 48 हजार जादुई पहेलियां लिखकर युवाओं को नई प्रेरणा दी है। नगर पंचायत कपकोट के ऐठाण निवासी हरिमोहन बचपन से परिश्रमी रहे हैं।
उन्हें कुछ हटकर करने का जुनून बचपन से ही था। ऐठानी जनता इंटर कालेज असों में पीटीए शिक्षक हैं। 2009 में अमर उजाला के अंक में प्रकाशित जादुई पहेलियों ने उन्हें ऊंचाई छूने को प्रेरित किया।
उन्हें शुरू-शुरू में पहेलियां बनाने में कुछ परेशानियां हुईं। कहते हैं दिलोजान से किए जाने वाले काम से हर कठिन डगर आसान हो जाती है। उन्होंने 1260 घंटे में 48 हजार पहेलियां तैयार कर लीं।
अलग-अलग अंकों में बनी पहेलियों की खासियत यह है कि उसे जिस हिस्से से भी जोड़ा जाए, जोड़ एक समान ही आता है।
हरिओम ने पहेलियों को लिखने का काम 25 फरवरी 2009 से शुरू किया जो 21 अप्रैल 2009 को पूरा हुआ। ऐठानी ने बताया कि उनका लक्ष्य अब अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज कराना है।
31 जुलाई 2015 को उन्हें डाक से मिले पत्र में लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड के संपादक विजय घोष ने उनका नाम विश्व रिकार्ड में दर्ज होने की जानकारी दी है।