मकर संक्रांति पर नगर के पौराणिक बागनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के संगम पर हर-हर महादेव के घोष के साथ गोता लगाया और बाबा बागनाथ, कालभैरव नाथ और बाणेश्वर भगवान को जलार्पण किया। श्रद्धालुओं ने पंडितों से रुद्री पाठ भी कराया।
ब्रह्म्म मुहूर्त से ही भक्तों का संगम पर तांता लग गया। उन्होंने भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद बाबा बागनाथ को बेलपत्र के साथ जल अर्पित किया। मंदिर में रुद्री पाठ करने के बाद कालभैरव नाथ और बाणेश्वर समेत अन्य मंदिरों में पूजा अर्चना की। रावल और गोस्वामी परिवार ने श्रद्धालुओं को प्रसाद बांटा। कई भक्तों ने बाणेश्वर के मंदिर की दीवार पर अपनी मनौती लिखी। उधर, नगर पंचायत कपकोट के शिव मंदिरों, हिचौड़ी के कालभैरव नाथ, भगवान महारुद्र, तप्तकुंड, भद्रतुंग, मोहली के शिव मंदिर और कांडा के गोपेश्वर महादेव मंदिर में जलार्पण करने वालों की भीड़ रही।
जनेऊ और चूड़ाकर्म वालों की उमड़ी भीड़
बागेश्वर। माघ पर्व शुरू होते ही रविवार को संगम और सूरजकुंड में जनेऊ संस्कार और चूड़ाकर्म करने वालों की भीड़ रही। लोग बच्चों के इन संस्कारों को कराने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचे थे। अनेक लोगों ने पूर्वजों को श्राद्ध तर्पण भी किया। बागनाथ मंदिर में पूजा कराने वाले पंडित हेम चंद्र जोशी ने बताया कि शिव पुराण में संगम और सूरजकुंड में जनेऊ, चूड़ाकर्म संस्कार और पितरों के श्राद्ध तर्पण कराने का विषद वर्णन है।