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सरकार डाकघर भी नहीं खोल सकी तो पलायन कर गए 78 मवासे

Sat, 03 Feb 2018 11:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संजय जोशी कपकोट (बागेश्वर)। 
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तोली गांव का दृश्य। - फोटो : amar ujala
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सरकार जब गांव में डाकघर और बैंक भी नहीं खोल सकी तो ब्लॉक के सुदूरवर्ती तोली गांव से 78 मवासे पलायन कर गए। तोली के ग्रामीण गांव में पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं न होने से भी परेशान हैं। उनका कहना है कि सरकारों की उपेक्षा के कारण ही गांव खाली होता जा रहा है। जनप्रतिनिधि गांव में आते हैं, लेकिन आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला।

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तोली ग्राम पंचायत की जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 1400 के करीब है। गांव में पहले तीन सौ से भी अधिक परिवार रहते थे। बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने के कारण तोली और सुलमती तोक से 50 जबकि चोरखरक तोक से 28 परिवार पलायन करके कपकोट, बागेश्वर, हल्द्वानी और दिल्ली चले गए हैं। 1998 में उरेडा की पन बिजली परियोजना का निर्माण हुआ था, लेकिन नियमित रूप से बिजली नहीं आती है।

ये बोले ग्रामीण
 समय पर सड़क का निर्माण शुरू होता तो लोगों को पलायन के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। राइंका की कक्षाएं हाइस्कूल के कमरों में चल रही हैं। गांव में रोजगार के संसाधन भी कुछ नहीं हैं। - गोवर्द्धन पाठक
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आंदोलन के बल पर सड़क का निर्माण शुरू हुआ। ग्रामीणों के डाकघर और बैंकिंग के लिए 15 किमी दूर कपकोट और भराड़ी जाना पड़ता है। गांव में पेयजल की भी समुचित व्यवस्था नहीं  है। -प्रकाश जोशी, बीडीसी सदस्य।
 

सरकारों की उपेक्षा के कारण गांव में आज तक एएनएम सेंटर तक नहीं है। इससे बच्चों का टीकाकरण प्रभावित होता है और प्रसव पीड़िताओं की समस्याएं भी दोगुनी हो जाती है।

- कमला देवी
 

 गांव में संचार सुविधा नहीं है। मोबाइल पर बात करनी हो तो ऊंची चोटियों पर जाना पड़ता है। इससे दिनचर्या ही गड़बड़ा जाती है। कई लोग पशुपालन करते हैं लेकिन डेयरी नहीं खोली गई है। - विमला देवी

गांव में किसी भी डीएम और एमपी के कदम नहीं पड़े हैं। गांव के गधेरों में पैदल पुल नहीं होने से बरसात में काफी दिक्कतें होती हैं। भूस्खलन से भी काफी नुकसान हुआ है। - भूपाल गढ़िया 

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