महात्मा गांधी के शांति, अहिंसा, प्रेम के संदेश को स्वीडन के ग्रामीण दुनियाभर में पहुुंचाना चाहते हैं। उन्हेें अब तक गांधी को शांति का नोबेल पुरस्कार न मिलने का मलाल है।
इसलिए ग्रामीण अपनी तरफ से गांधी जी के सम्मान में शांति का पुरस्कार देंगे। समाज सेविका राधा बहन पांच दिसंबर को ओरुस्ट में पीस मूवमेंट नामक संस्था से यह पुरस्कार प्राप्त करेंगी।
गांधी जी की मृत्यु को 68 साल हो गए हैं। उनके आदर्शों के प्रसार की प्रक्रिया अभी भी जारी है। दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान की अध्यक्ष 82 वर्षीया समाज सेविका राधा बहन बताती हैं कि स्वीडन के ग्रामीण इलाकों में गांधी की विचारधारा को लेकर नई पीढ़ी का लगाव विश्व समुदाय के लिए आशा की एक किरण के समान है।
वह भी ऐसे समय में जबकि दुनियाभर में कट्टरपंथी, हिंसक ताकतें सिर उठाने का प्रयास कर रही हैं, वहीं स्वीडन में गांधी की विचारधारा से प्रभावित लोग कई सालों से भारत आकर गांधी साहित्य ले जा रहे हैं और उसका प्रचार, प्रसार कर रहे हैं।
स्वीडन के ग्रामीणों की पीस मूवमेंट ऑफ ओरुस्ट नामक संस्था का मानना है कि स्वर्गीय गांधी के नाम पर शांति का नोबेल पुरस्कार उनके उत्तराधिकारियों को दिया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
अब संस्था अपनी तरफ से स्वर्गीय गांधी को इसी तरह का सम्मान देगी। इसका नाम उन्होंने अल्फ्रेड नोबेल की भावना के अनुसार शांति पुरस्कार रखा है। इसके तहत मात्र सम्म्मान पत्र मिलेगा।
किसी प्रकार की धनराशि इसमें शामिल नहीं है। राधा बहन ने बताया कि गांधी शांति प्रतिष्ठान की अध्यक्ष के नाते यह पुरस्कार लेने वह स्वयं स्वीडन स्थित ओरुस्ट जाएंगी। वहां पांच दिसंबर को सम्मान समारोह होगा।