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फायर सीजन से ज्यादा अब धधक रहे जंगल

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बागेश्वर में धधके मालता के जंगलों से उठता धुआं। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। फायर सीजन बीतने के बाद अक्तूबर में जंगल की आग के छह मामले सामने आए हैं। एक सप्ताह पहले सिमार के जंगलों में आग लगने के बाद पिछले दो दिनों से मालता के जंगल आग से धधक रहे हैं। आग से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। वन विभाग के मुताबिक अराजक तत्व जंगल में आग लगा रहे हैं।
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शुक्रवार को सिमार के जंगलों का काफी हिस्सा आग से खाक हो गया है। पिछले दो दिनों से लगी आग पर वन विभाग ने बमुश्किल काबू पा लिया है लेकिन वन संपदा को खासा नुकसान पहुंचा है। अक्तूबर में आग की यह छठी घटना है जबकि इस साल फायर सीजन में केवल चार घटनाएं सामने आई थीं। वन विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक इस साल लॉकडाउन के चलते बागेश्वर रेंज, गढ़खेत, कपकोट रेंज के आरक्षित वन में एक-एक घटना और धरमघर रेंज के वन पंचायत में एक घटना हुई थी, जिससे कुल 5.25 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हुई थी, जबकि फायर सीजन बीतने के बाद 14 अक्तूबर को कठायतबाड़ा के पास कुकुड़ामाई के जंगलों में आग धधकी थी। इसके बाद काफलीगैर के जंगल भी आग से धधक उठे। हालांकि, वन विभाग की टीम ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर आग पर काबू पा लिया था। काफलीगैर के बाद जिला मुख्यालय स्थित चंडिका की पहाड़ी और पंद्रहपाली के जंगलों में आग लग गई। इन घटनाओं के बाद 21 घिंघारुतोला के जंगल आग से धधक उठे। इसके दो दिन बाद ही सिमार के जंगलों में आग लग गई। वन विभाग के रेंजर मनीष कुमार के मुताबिक अराजक तत्वों की वजह से लगातार आग की घटनाएं हो रही हैं। उनका कहना है कि जंगलों में आग लगाते मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जंगल जलने से जैव विविधता हो रही नष्ट : रावल
बागेश्वर। पर्यावरणविद पूरन सिंह रावल का कहना है कि जंगलों में आग लगने के कारण जैवविविधता नष्ट हो रही है। छोटे पौधों पूरी तरह से नष्ट हो रहे हैं और वन्यजीवों को काफी क्षति पहुंच रही है। इस बार फायर सीजन बीतने के बाद आग की घटनाओं का सामने आना चिंताजनक है। फायर सीजन में काफी कम घटनाएं हुई थी। इसके पीछे लॉकडाउन बड़ा कारण रहा है। अब मानवीय हस्तक्षेप के कारण जंगल आग से धधक रहे हैं। बारिश की कमी से जंगल सूख गए हैं और अब जंगलों में गिरा पिरुल आग पकड़ते ही सुलग रहा है। कहा कि वनों की सुरक्षा के लिए वन पंचायत को मजबूत किया जाना चाहिए। वन पंचायत और वन विभाग के माध्यम से वनों की सुरक्षा के लिए अलग व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे प्रतिस्पर्धा का माहौल पैदा होगा। प्रत्येक वन पंचायत स्तर पर आग नियंत्रण जागरूकता मिशन का संचालन किया जाना चाहिए। हिमाच्छादित सुंदर वनों को बचाने के लिए विशेष कदम उठाए जाने चाहिए।
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