विभाग का दावा आग पर नियंत्रण के लिए पूरी तरह तैयार हैं हम, 128 फायर वाचर तैनात
एक मास्टर कंट्रोल रूम, एक मॉडल क्रू स्टेशन और 29 केंद्र भी बनाए गए हैं
बागेश्वर। जिले में वनाग्नि की छिटपुट घटनाओं के बीच तीन बड़ी घटनाएं हुई हैं। बैजनाथ रेंज में हुई इन घटनाओं में 1.2 हेक्टेयर जंगल जल चुका है और विभाग को 3600 रुपये का नुकसान हुआ है। विभाग का दावा है कि वनों की आग नियंत्रण के लिए पुख्ता तैयारी होने की बात कही है। विभाग ने एक मास्टर कंट्रोल रूम, एक मॉडल क्रू स्टेशन और 29 क्रू स्टेशन बनाए हैं। 128 फायर वॉचरों की नियुक्ति भी की गई है।
15 फरवरी से वनाग्नि सीजन की शुरूआत हो जाती है। मार्च तक अधिक गर्मी नहीं पड़ने से जंगलों के जलने के कम ही मामले होते हैं। अप्रैल से जून के बीच का समय बेहद संवेदनशील होता है। इस दौरान तापमान में बढ़ोतरी, पिरुल गिरने और वातावरण में नमी कम होने के कारण जंगलों के जलने का खतरा अधिक रहता है। हर साल जिले में कई हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ जाता है।
हंस फाउंडेशन के माध्यम से 200 गांवों में 1100 स्वयंसेवियों को भी प्रशिक्षण देकर तैयार किया गया है। वन पंचायत सरपंच, नवयुवक मंगल दल, महिला मंगल दल आदि को भी जागरूक कर वनाग्नि नियंत्रण में सहयोग करने की अपील की गई है। विभाग के पास एक ड्रोन कैमरा समेत ब्लोअर, फायर रेक समेत जरूरी उपकरण पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं।
कोट- अब तक वनाग्नि की कोई बड़ी घटना जिले में नहीं हुई है। छिटपुट आग लगने की जानकारी मिलते ही विभागीय कर्मचारी मौके पर जाकर आग कंट्रोल कर रहे हैं। -ध्रुव सिंह मर्तोलिया, डीएफओ