बागेश्वर। जिले का विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक रूट इन दिनों विदेशी पर्यटकों के लिए पहली पसंद बना हुआ है। पहाड़ की हसीन वादियां, शांत वातावरण और कुमाऊंनी संस्कृति सात समंदर पार के देशों से आने वाले सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। बीते 16 मई को नार्वे के एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के 39 सदस्यीय दल ने पिंडारी ग्लेशियर के पुराने रूट से ट्रैकिंग की। सैलानी धाकुड़ी तक की ट्रेकिंग कर वापस लौट गए हैं।
दल का नेतृत्व कर रहे रानीखेत निवासी लोकल गाइड राजू बिष्ट ने बताया कि दल में यूएसए, साउथ अफ्रीका, ब्रिटेन, कनाडा, नीदरलैंड, नार्वे, आस्ट्रेलिया, सर्बिया, जर्मनी और स्वीडन सहित 10 अलग-अलग देशों के कुल 35 विदेशी छात्र-छात्राएं शामिल थे। दल के लीडर पहले भी कई बार पिंडारी की यात्रा पर आ चुका है। कुमाऊं अंचल की विशिष्ट लोक संस्कृति, यहां का पारंपरिक खान-पान और स्थानीय लोगों का बेहद सरल व आत्मीय रहन-सहन इन विदेशी युवाओं को आत्मिक शांति देता है।
यही अनूठा आकर्षण इन्हें हर बार सात समंदर पार से पहाड़ों की ओर खींच लाता है। रेंजर डॉली डोभाल ने बताया कि ट्रैक रूट पर आने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की सुरक्षा और ट्रैकिंग सुविधाओं को और अधिक सुगम बनाना वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है। विदेशों पर्यटकों की आमद से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी। दल में नार्वे के पीटर निकोलस, जर्मनी की कोजिमा रेनी, आस्ट्रेलिया की कोडी समारा, यूएसए की अनाया मैरी, कनाडा के क्लेब माल्कोलम, सर्विया के डजेसिका आदि मौजूद रहे।
गाड़ी के सफर से खत्म हुआ ट्रैकिंग का असली रोमांच
विदेशी पर्यटकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अब खाती गांव तक सीधे सड़क बन जाने और गाड़ियों की आवाजाही शुरू होने से इस ट्रैक में एडवेंचर की भारी कमी महसूस हो रही है। वाहन के जरिए सीधे खाती तक पहुंच जाने से वह रोमांच और थ्रिल खत्म हो गया है, जिसके लिए पिंडारी रूट पूरी दुनिया में जाना जाता था। दल के लीडर और लोक गाइड का मानना है कि पर्यावरण और एडवेंचर टूरिज्म के लिहाज से कोर ट्रैक रूटों तक वाहनों की सीधी पहुंच साहसिक पर्यटन के मूल स्वरूप को प्रभावित कर रही है।
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पिंडारी ग्लेशियर रूट पर आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं और असली एडवेंचर का माहौल देना हमारी प्राथमिकता है। खाती तक सड़क मार्ग बनने से जहां स्थानीय ग्रामीणों को सुविधा हुई है, वहीं ट्रैकर्स को रोमांच की कमी खलने की बात भी सामने आई है। वनों और प्राकृतिक पैदल रास्तों के संरक्षण के लिए विभाग लगातार काम कर रहा है। लोहारखेत वाले पुराने ट्रैक को एडवेंचर के शौकीनों के लिए वैकल्पिक रूप से कैसे पुनर्जीवित रखा जा सकता है, इस पर तकनीकी टीम से चर्चा कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। - आदित्य रत्न, डीएफओ बागेश्वर