कपकोट (बागेश्वर)। आपदा की मार और मानसूनी दुश्वारियों को झेल रहे कपकोट क्षेत्र में लोक आस्था और पारंपरिक सौहार्द का अनोखा रंग देखने को मिला। प्राकृतिक आपदा से उपजे संकट और बंद पड़े मार्गों के बीच लोक पर्व घी संक्रांति के अवसर पर पूरा दानपुर क्षेत्र झोड़ा-चांचरी की स्वरलहरियों से गुंजायमान रहा।
तल्ला, मल्ला और बिचला दानपुर तीनों पट्टियों के गांवों में ग्रामीणों ने एकजुट होकर लोक पर्व को पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया। कपकोट तहसील के ऐठाण, शामा, भनार और सोराग के दर्जनों गांवों में चौपाल और आंगन में झोड़ा-चांचरी गायन हुआ। पुरुषों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर गोल घेरे में लोकगीतों की धुन पर कदमताल की। ग्रामीणों ने सामूहिक नृत्य के जरिए अपनी अटूट सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। वाछम के ग्राम प्रधान दिनेश दानू ने बताया कि दानपुर और पिंडर घाटी के गांवों में झोड़ा-चांचरी गाने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आपदा और विपरीत परिस्थितियों के बीच ग्रामीणों को एक-दूसरे से जोड़ने और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है।