जिले में एक सप्ताह से रसोई गैस की आपूर्ति ठप पड़ी है। सिलेंडर नहीं आने से लोग ईंधन के लिए पेड़ काटने को मजबूर हो गए हैं। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने शासन-प्रशासन से सिलेंडरों की शीघ्र आपूर्ति कराने की मांग की है। उन्होंने आपूर्ति शीघ्र सुचारु नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
बता दें कि गुजरात में आई भीषण बाढ़ का असर जिले की रसोई गैस आपूर्ति पर पड़ा है। यहां पिछले एक सप्ताह से रसोई गैस के वाहन नहीं पहुंचे हैं। सिलेंडर नहीं आने से उपभोक्ताओं को कई परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। सिलेंडर के अभाव में होटल व्यवसाय भी चरमरा गया है।
गैस की आपूर्ति ठप होने से शहर से लेकर गांव तक के उपभोक्ताओं के सामने खाने पकाने के लिए ईंधन की समस्या खड़ी हो गई है। लोगों को पर्याप्त मात्रा में केरोसिन नहीं मिलने से समस्या और भी विकराल हो गई है। गांवों में लोग ईंधन के लिए पेड़ों को काट रहे हैं। लोगों ने शासन-प्रशासन से गैस की शीघ्र आपूर्ति करने के लिए प्रभावी कार्यवाही करने की मांग की है।
स्थानीय प्रबंधकों का कहना
रसोई गैस एजेंसी बागेश्वर के प्रबंधक गोविंद सिंह बाफिला ने बताया कि जिले में रसोई गैस की आपूर्ति बॉटलिंग प्लांट हल्दूचौड़ (हल्द्वानी) से होती है। इस प्लांट में आपूर्ति गुजरात स्थित रिफाइनरी से होती है। गुजरात में बाढ़ आने से हल्दूचौड़ स्थित प्लांट तक गैस के बड़े टैंकर नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ के नियंत्रण में होते ही आपूर्ति भी सुचारु हो जाएगी। गैस के लिए उन्होंने 20 लाख रुपये का एडवांस ड्राफ्ट भेजा है।
उधर, कपकोट एजेंसी के प्रबंधक राजेंद्र मावड़ी ने बताया के गैस के लिए आठ लाख रुपये का एडवांस ड्राफ्ट भेजा है। गरुड़ के मैनेजर राजेश कुमार ने बताया कि गैस के लिए सात लाख रुपये का ड्राफ्ट जबकि कांडा के प्रबंधक प्रमोद पांडे ने बताया कि उन्होंने रसोई गैस के लिए 10 लाख रुपये का एडवांस ड्राफ्ट भेजा है। उन्होंने कहा कि प्लांट से गैस आते ही आपूर्ति सुचारु हो जाएगी। प्रबंधकों ने उपभोक्ताओं से सहयोग बनाए रखने की अपील की है।