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हाल ए संचार क्रांति : यहां फोन करने से पहले तलाशो सिग्नल

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हल्के सिग्नल आ रहे भाई:पोथिंग गांव के जोशीखोलाधार में पहाड़ी में चढ़कर अपनों से बात करने की कोशिश - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। संचार क्रांति के इस युग में लोग मोबाइल फोन पर बात करने के लिए पेड़ और पहाड़ी पर चढ़कर सिग्नल खोज रहे हैं। यह कहीं और की नहीं अपने जिले के दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री शेर सिंह गढ़िया के गांव पोथिंग की हकीकत है। सिग्नल खोजने के लिए पेड़ और पहाड़ी पर चढ़ना ही काफी नहीं है, इसके लिए पहले चार से छह किलोमीटर की दूरी भी तय करनी पड़ती है, तब जाकर मोबाइल फोन पर हल्के सिग्नल आते हैं।
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कपकोट तहसील मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर पोथिंग गांव में 15 तोक हैं। गांव की आबादी तीन हजार है। इनमें से ढाई हजार से अधिक लोगों को संचार सुविधा का अब तक लाभ नहीं मिल रहा है। केवल तीन तोक उछात, मातोली और दूूनी में मोबाइल फोन के हल्के सिग्नल पकड़ते हैं। बाकी 12 तोकों भटौड़ा, खोलीखेत, पोथिंग, बीथी, बिनाड़ी, बधौरा, नौगांव, सीमी, हैजर, शोभाकुंड, गडियार और सिलपाड़ा संचार सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीण गांव से चार से छह किमी की दूरी पर स्थित नौधार, जोशीखोलाधार और पोखरीधार जाकर सिग्नल खोजते हैं।
इन स्थानों पर भी काफी देर तक सिगनल की खोज करनी पड़ती है। पहाड़ी पर सिग्नल नहीं मिलने पर कुछ युवा जान जोखिम में डालकर ऊंचे पेड़ों पर चढ़ जाते हैं। अक्सर पेड़ों पर चढ़कर बात करने में हादसे का डर बना रहता है, लेकिन युवा इस तरह का खतरा उठाने को मजबूर हैं।
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बोले लोग
ग्रामीण हेम चंद्र, हीरा सिंह, संजय कुमार का कहना है कि पोथिंग गांव हमेशा से उपेक्षित रहा है। गांव आज भी विकास से कोसों दूर है। सुविधाओं के नाम पर नेता आश्वासन का झुनझुना पकड़ा देते हैं। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। जीतने के बाद सब भूल जाते हैं। ग्रामीण अपने हाल पर जीने को मजबूर हैं।
इन गांवों के भी यही हाल
बागेश्वर। संचार सुविधा की परेशानी झेलना वाला पोथिंग अकेला गांव नहीं है। कपकोट के पिंडर घाटी के गांवों में भी यही हाल है। खाती, वाछम, बोरबलड़ा, कुंवारी और शामा उप तहसील के गोगिना, कीमू, रातिरकेटी सहित कई गांवों में भी अब तक संचार के कोई साधन नहीं हैं। इन गांवों के अधिकतर युवा महानगरों में रोजगार करते हैं। संचार सुविधा नहीं होने के कारण लोग अपने प्रियजनों से बात तक नहीं कर पाते। ग्रामीण विधायक से लेकर सांसद तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हैं।
पोथिंग गांव में बीएसएनएल का कोई टावर नहीं है। फिलहाल नए टावर नहीं लग रहे हैं। भविष्य में जब टावर लगाने का काम शुरू होगा तो पोथिंग गांव को भी संचार सुविधा से जोड़ा जाएगा। - हेमंत जोशी, जेटीओ बीएसएनएल बागेश्वर
कपकोट विधानसभा क्षेत्र में जियो कंपनी के 12 टावर लगाए जा रहे हैं। पोथिंग सहित अन्य स्थानों के लिए 10 टावर लगाने की मांग की गई है। कुछ गांव अगले दो महीने में संचार सुविधा से जुड़ जाएंगे। विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक गांव को जल्द ही संचार सुविधा से जोड़ा जाएगा। - बलवंत सिंह भौर्याल, विधायक कपकोट।
पोथिंग गांव ही नहीं आसपास के कई गांवों में संचार की समस्या है। इस समस्या से मैं वाकिफ हूं। प्रदेश सरकार भी लोगों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रयासरत हूं। जल्द ही बेहतर संचार सुविधा का लाभ मिलेगा। -शेर सिंह गढ़िया, बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष।
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