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जीवन में कष्टों की भरमार पर पिता, पुत्र का कैरियर संवारने के लिए बेकरार

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फादर्स डे के लिए पुत्र हिमांशु के साथ बागेश्वर के रमेश चंद्र जोशी। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। हर पिता बच्चों का भविष्य संवारने के लिए हरसंभव प्रयास करता है। बच्चों का जीवन संवरे इसके लिए पिता अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं। ऐसे ही एक पिता अपने पुत्र का भविष्य संवारने के लिए हाड़तोड़ मेहनत कर रहे हैं। पुत्र भी अपने कॅरिअर संवारने के साथ ही पिता का भी हरकदम पर हाथ बढ़ा रहा है। पिता-पुत्र की यह जोड़ी फादर्स डे पर काफी सराही गई है।
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अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा निवासी रमेश चंद्र जोशी (56) का संघर्षों से गहरा रिश्ता है। करीब 30 वर्ष पहले वह पिथौरागढ़ में जल संस्थान में संविदा पर कार्यरत थे। बकौल जोशी करीब 10 वर्ष कार्य करने विभाग ने नियमित करने के बजाय जबरदस्ती उनसे शौकिया काम करने का पत्र ले लिया। दुखी मन से जोशी ने जल संस्थान में काम छोड़ दिया। उनके एक मित्र ने बागेश्वर में काम करने का सुझाव दिया तो वह अपना कुछ सामान लेकर बागेश्वर आ गए। उस समय बागेश्वर में कंट्रीवाइड स्कूल का भवन बन रहा था। रमेश को प्लंबर का पहला काम वहीं मिल गया। मधुर स्वभाव और उनके काम से प्रभावित होकर लोग उन्हें काम देने लगे। जीवन में तमाम कष्ट झेल चुके रमेश इस उम्र में भी पुत्र को मंजिल दिलाने के लिए जीजान से जुटे हैं। दो वर्ष पहले उनके पुत्र हिमांशु ने बीएससी किया। अब वह हल्द्वानी से डी फार्मा कर रहा है। बताते हैं कि प्लंबरी का काम करते हुए भरड़ा हार्डवेयर के मालिक कुंदन भरड़ा के साथ आत्मीय रिश्ता बन गया। भरड़ा ने हल्द्वानी के अपने मकान में हिमांशु की रहने की व्यवस्था कर दी। लॉकडाउन की वजह से इस समय हिमांशु का संस्थान बंद है। पुत्रधर्म निभाते हुए वह भी पिता के कार्य में हाथ बंटा रहा है।
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