बागेश्वर। सगंध खेती से आय अर्जित करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। किसान अब पिपरमिंट की नई किस्म सिम-इंदुश्री की पैदावार से मालामाल हो सकते हैं।
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) ने उच्च उत्पादक और मीठी सुगंध वाली इस नई किस्म को विकसित किया है। विगत आठ अक्तूबर को जारी की गई सिम-इंदुश्री से किसान 50,000 रुपये खर्च कर महज तीन महीने में 83,000 रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर सकते हैं।
सिम-इंदुश्री को संस्थान के वैज्ञानिकों ने पांच साल की मेहनत के बाद अनुसंधान और विकिरण आधारित उत्परिवर्तन प्रजनन तकनीक से विकसित किया है। शोध का नेतृत्व सीमैप लखनऊ के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र कुमार ने किया।
एग्रो-टेक्नोलॉजी से संबंधित क्षेत्रीय अध्ययन और प्रदर्शन मूल्यांकन सीमैप पुरड़ा के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी प्रवल प्रताप सिंह वर्मा की देखरेख में संपन्न हुआ। सीमैप पंतनगर केंद्र के प्रभारी व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र पडलिया के मार्गदर्शन में फील्ड ट्रायल किए गए। सिम-इंदुश्री से सामान्य पिपरमिंट के सापेक्ष करीब 20 प्रतिशत अधिक तेल उत्पादन होगा।
इसके तेल में मेंथॉल की मात्रा 50 प्रतिशत और मेंथोफ्यूरान 2-3 प्रतिशत पाई गई, जो अमेरिकी पिपरमिंट तेल की गुणवत्ता के समान है।
नई किस्म के पौधे 80 से 90 सेमी के चौड़ी पत्तियों वाले और मजबूत संरचना वाले हैं। ट्रांसप्लांटिंग विधि से भी इसकी सफल खेती संभव है। तीन महीने में तैयार होने वाली खेती के चलते यह किसानों के लिए लाभकारी होगी। किसान एक हेक्टेयर खेती करने पर 80 हजार से अधिक का मुनाफा कमा सकता है।