बागेश्वर। न्यूजीलैंड का कीवी फल हिमाचल प्रदेश के साथ ही उत्तराखंड में भी खूब पैदावार दे रहा है। खास बात यह है कि जिले के एक किसान ने बाकायदा कुटीर उद्योग स्थापित कर इस फल का जैम बाजार में उतार दिया है। हिमालयन कीवी जैम नाम से तैयार कीवी के इस जैम को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। न्यूूजीलैंड के कीवी फल को चाइनीज गूजवैरी के नाम से भी जाना जाता है।
इसकी हिमाचल प्रदेश में अच्छी पैदावार होती है। हाल के वर्षों में हुए प्रयोग में उत्तराखंड की धरती भी इस फल के लिए मुफीद पाई गई है। करीब एक दशक पूर्व राज्य के नैनीताल, पिथौरागढ़ सहित अन्य जिलों में प्रयोग के तौर पर लगाए गए कीवी ने अच्छा उत्पादन दिया। हालांकि इस फल के उत्पादन में किसानों ने अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाई लेकिन बागेश्वर जिले के शामा गांव के तीन किसान भवान सिंह, गोविंद सिंह, राजेंद्र सिंह ने करीब तीन हेक्टेअर में कीवी के 400 पौधे लगाए हैं।
दो हजार से 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस गांव में लगाए गए कीवी के अधिकतर पौधों ने फल देना शुरू कर दिया है। शुरुआती दौर में यहां पर 20 से 25 क्विंटल फलों का उत्पादन हो रहा है। किसानों ने हेवाल्ड, ब्रूनो, एलीसन, मोंटी प्रजाति के पौधे लगाए हैं। किसानों को घर में एक किलो कीवी की कीमत 80 से 100 रुपए मिल रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि शामा के एक किसान भवान सिंह ने कीवी के फलों से जैम बनाना शुरू कर दिया है। भवान सिंह ने कुटीर उद्योग स्थापित कर हिमालयन कीवी फ्रूट के नाम से जैम बाजार में उतारा है। इसकी कीमत 250 रुपए प्रति किलो रखी गई है। पोटेशियम, कैल्शियम सहित तमाम खनिजों से भरपूर कीवी फल का जैम हाथों हाथ बिक रहा है। इससे किसान उत्साहित हैं। शामा के अलावा कौसानी में भी कुछ किसान इसकी खेती कर रहे हैं।