इस बार मौसम के साथ देने से धान का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। सालों बाद सिंचित और असिंचित इलाके के काश्तकारों के भकार (कोठार) धान से भर गए हैं। चैती धान का वर्षों बाद अच्छा उत्पादन हुआ है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार बागेश्वर जिले में कुल 15 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की खेती होती हैं।
सर्वाधिक धान का उत्पादन गरुड़ ब्लॉक में होता है। ब्लॉक कृषि प्रभारी धनराम आर्य के अनुसार 10 साल बाद असिंचित भूमि में चैती और बीएल 85 प्रजाति के धान का अच्छा उत्पादन हुआ है।
गरुड़ के पुरुड़ा गांव निवासी एवं प्रगतिशील काश्तकार राजेंद्र सिंह थायत, किसान क्लब देवनाई के अध्यक्ष सुंदर बरोलिया और गढ़सेर गांव निवासी काश्तकार गोपाल दत्त पाठक ने बताया कि गरुड़ ब्लॉक के अंतर्गत धान का सर्वाधिक उत्पादन राजसेरा, मोतीसारी, देवनाई घाटी, पुरुड़ा, पिंगलों घाटी, पुरुड़ा, कज्यूली, गागरीगोल और टीट बाजार इलाके में होता है।
काश्तकारों ने बताया कि धान रोपाई के समय पर्याप्त बारिश होने और फसल को बराबर बारिश का पानी मिलने से पूरे इलाके में धान का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। जिला कृषि अधिकारी वाईपी मौर्या का कहना है जिले के बागेश्वर, गरुड़ और कपकोट ब्लॉक में धान का इस बार रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है।
उन्होंने बताया कि जिले में बीएल 85 और बीएल 62 प्रजाति के धान की खेती होती है। राजस्व विभाग की फसल कटिंग के अनुसार जिले में धान पैदावार 10-20 प्रतिशत बढ़ी है। विकास खंड के सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत पप्या के काश्तकार एवं पूर्व प्रधान गोपाल सिंह परिहार के अनुसार इस बार उनके गांव में असिंचित भूमि में भी चैती धान की अच्छी पैदावार हुई है।
जिले में पिछले चार साल में धान का उत्पादन
2014 - 190,000 क्विंटल
2015 - 195000 क्विंटल
2016 - 205000 क्विंटल
2017 - 255,000 क्विंटल