कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से हरखोला गांव में गेहूं की प्रजाति वी.एल. गेहूं- 907 पर प्रक्षेत्र दिवस के अवसर पर कृषक गोष्ठी हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. नवल किशोर सिंह ने कृषकों को बताया कि वी.एल. गेहूं- 907 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थान वीपीकेएएस, अल्मोड़ा द्वारा विकसित की गई है। यह प्रजाति पर्वतीय क्षेत्रों में समय से बुवाई, वर्षाश्रित एवं सिंचित खेती के लिए अनुकूल है।
इसकी बुआई अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से नवंबर के प्रथम पखवाडे़ तक की जाती है। इसके पकने की अवधि 160 से 180 दिन है। सिंचित भूमि में 80 से 90 किलो प्रति नाली एवं असिंचित भूमि में 45 से 55 किलो प्रति नाली उपज मिलता है। इस वर्ष सूखे की स्थिति को देखते हुए उत्पादित गेहूं की बीज को आगामी वर्ष के लिए रखने की सलाह दी। गेहूं के भंडारण के दौरान लगने वाले कीट एवं रोगों के प्रबंधन की जानकारी भी दी।
कृषकों को आगामी खरीफ फसलों के बीजोपचार की जानकारी दी गई। कार्यक्रम सहायक निधि सिंह ने ग्रामीण महिलाओं को पोषण उद्यान विषय पर प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों को शिमला मिर्च, बैगन एवं टमाटर के पौधे वितरित किए। वहां ग्राम हरखोला के प्रगतिशील काश्तकारों हरीश जोशी, भुवन जोशी, विशन दत्त, नवीन जोशी, पूरन जोशी, जानकी देवी, मोहनी देवी सहित 42 काश्तकार मौजूद थे।