बागेश्वर। जिले के साथ ही अलग ब्लॉक भी बनाने की मांगें उठी थीं। जिला तो 1997 में बन गया, लेकिन अलग ब्लॉक बनाने की हसरत 19 साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी। अलग ब्लॉक न बनने से गांवों के विकास पर बुरा असर पड़ रहा है। गांवों में अधिकारी और कर्मचारी भी नहीं पहुंच पाते हैं। इससे ग्रामीणों को विकास योजनाओं की भी ठीक से जानकारी नहीं हो पाती है। विकास की धीमी गति के कारण पलायन पर भी नहीं रुक सका है। क्षेत्र के लोगों ने अलग ब्लॉकों का गठन शीघ्र नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
बागेश्वर को जिला बनाने की मांग के साथ ही चौड़ास्थल, नाकुरी, शामा, कमेड़ीदेवी, कांडा, कठपुड़ियाछीना, रवांईखाल को अलग ब्लॉक बनाने की मांग उठी थी। जिला तो 15 सितंबर 1997 को बन गया, लेकिन अलग ब्लॉकों का गठन नहीं हो सका। अलग ब्लॉक न बनने से खास तौर पर सुदूरवर्ती गांवों के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। जिले में बागेश्वर, कपकोट, गरुड़ कुल तीन ही ब्लॉक ही हैं। इनमें क्रमश: 192, 118, 106 ग्राम पंचायतें हैं। ब्लॉकों की भौगोलिक स्थिति अत्यंत जटिल हैं।
एक दिन में एक गांव का भी ठीक से भ्रमण नहीं हो पाता है। गांवों में विकास का हाल यह है कि वहां चलने के लिए ढंग की पगडंडी तक नहीं बन सकी है। प्राइमरी से इंटर तक की शिक्षा का बुरा हाल है। स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं। कई तोकों में रात में रोशनी के लिए बिजली नहीं है। वर्षों पूर्व बनी पेयजल योजनाएं नहीं सुधर सकी हैं। गांवों में बुनियादी सुविधाएं न होने के कारण लोग गांव छोड़ने को मजबूर हैं। कठपुड़ियाछीना, नाकुरी, चौड़ास्थल को अलग ब्लॉक बनाने की मांग को लेकर कई बार आंदोलन हो चुके हैं।
पिछले वर्ष शासन के निर्देश पर प्रशासन ने कांडा, कठपुड़ियाछीना को ब्लॉक बनाने की मांग को लेकर रायशुमारी की, लेकिन केंद्र से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका। चौड़ास्थल को अलग ब्लॉक बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष विक्रम दानू, नाकुरी के अध्यक्ष गौरी दत्त जोशी, सचिव धन सिंह भौर्याल, कठपुड़ियाछीना के अध्यक्ष नरेंद्र रावत, संरक्षक ओमप्रकाश टम्टा ने बताया कि यदि अलग ब्लॉकों का शीघ्र गठन नहीं हुआ तो जनसहयोग से आंदोलन किया जाएगा।