राज्य कर्मचारी का दर्जा और न्यूनतम 18 हजार रुपये मानदेय सहित विभिन्न मांगों को लेकर उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने तहसील में प्रदर्शन किया। आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो 17 नवंबर को संसद भवन के सामने धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
आशा कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम मानदेय 18 हजार रुपये देने, राज्य सरकार की घोषणा के अनुरूप राज्य मद से दो हजार रुपये मानदेय देने, पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि का भुगतान एरिअर सहित तत्काल करने, बिना शर्त सभी आशाओं का बीमा करने, आशाओं को स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत लाने सहित विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें बंधुआ मजदूर बनाकर रख दिया गया है। जो भी वादे पूर्व में राज्य सरकार की ओर से किए गए थे, उन्हें आज तक पूरा नहीं किया गया है। बाद में आशाओं ने इस संबंध में सीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
वहीं, राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने धरना स्थल पर पहुंचकर आशाओं की समस्याएं सुनीं। उन्होंने मांगों के संबंध में शासन स्तर पर वार्ता करने का आश्वासन दिया। प्रदर्शन करने वालों में रीता देवी, रजनी देवी, जानकी जोशी, किरन उपाध्याय, शशि प्रभा, सरस्वती कोरंगा, हीरा कन्याल, पुष्पा साही, चंद्रा देवी, प्रेमा देवी, अंजना बिष्ट आदि थे।