भाजपा से निष्कासित किए गए कार्यकर्ताओं ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से न्याय मांगा है। उनका कहना है कि आज तक के तमाम चुनावों में पार्टी विरोधी गतिविधि और भीतरघात करने वाले पदाधिकारी ही उनके निलंबन की कार्रवाई कर रहे हैं। इससे पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ता आहत हैं।
पार्टी से निष्कासित किए गए तमाम कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से नि:स्वार्थ भाव से पार्टी के लिए कार्य करते आ रहे हैं। उन्होंने चुनावों से पूर्व ही प्रत्याशी मजबूत नहीं होने की स्थिति के कारण प्रदेश अध्यक्ष को अपने पदों से त्यागपत्र सौंप दिया था। राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजे पत्र में कहा है कि ऐसे लोग जो पंचायत, नगरपालिका, पिछली विधानसभा और जिला पंचायत के चुुनावों के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे वही आज उनके निलंबन की कार्रवाई कर रहे हैं। उनके पास ऐसे लोगों की पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के पूरे प्रमाण उपलब्ध हैं।
निष्कासित किए गए कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रत्याशियों की हार का ठीकरा उनके सिर फोड़ने के लिए ही उनका निलंबन किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने इस मामले में राष्ट्रीय अध्यक्ष से न्याय की उम्मीद जताई है। ज्ञापन भेजने वालों में पूर्व जिलाध्यक्ष उमा बिष्ट, महामंत्री राजेंद्र उपाध्याय, देवेंद्र गोस्वामी, भगवती धपोला, प्रेमा, गोविंद साह, सुरेंद्र धपोला सहित निष्कासित किए गए दो दर्जन कार्यकर्ता शामिल हैं।