बागेश्वर में सरयू और गोमती के साथ मिलकर त्रिवेणी संगम बनाने वाले भागीरथी नाले की दशकों से सफाई नहीं हुई है। केवल बरसात में ही इस नाले में जमा कचरा बहता है। लेकिन जगह-जगह पर अतिक्रमण के कारण अब बरसात में भी नाले की गंदगी को पूरी तरह साफ नहीं कर पाती है।
लगभग दो किमी लंबाई वाले भागीरथी नाले में घरों से लेकर होटलों तक की गंदगी समाती है। नाले के दोनों तरफ रहने वाले लोगों ने इस नाले को कूड़ाघर भी बनाया है। सड़क किनारे चलने वाले वर्कशॉप से निकलने वाला कचरा भी इसी में एकत्र होता है। भागीरथी में टनों के हिसाब से प्लास्टिक कचरा भी बिखरा पड़ा है। विडंबना यह है कि इस नाले की आज तक किसी ने सफाई नहीं की।
नाले की सफाई प्राकृतिक रूप से बरसात में ही होती है। हाल के वर्षों में नाले में अतिक्रमण होने से अब बरसात में भी कचरा पूरी तरह से साफ नहीं हो पाता है। धार्मिक नगरी बागेश्वर में पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित तमाम कार्यक्रम तो आयोजित किए जाते हैं लेकिन भागीरथी नाले को प्रदूषण से मुक्त करने की पहल आज तक किसी ने नहीं की। यदि यही हाल रहा तो भागीरथी नाले से बहने वाली गंदगी के कारण सरयू नदी का जल भी पूरी तरह से दूषित हो जाएगा।