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‘माफ कीजिएगा! 108 सेवा में ईंधन नहीं है’ 

Thu, 04 Jan 2018 10:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गरुड़ (बागेश्वर)।
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वाराणसी में 102 की 38, 108 की है 19 एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ पर स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा नहीं मिल पा रही है और आपातकाल में भी आपको खुद के ही भरोसे रहना पड़ेगा। ऐसा ही एक उदाहरण गरुड़ ब्लॉक के वज्यूला गांव में सामने आया है।

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यहां ब्रेन हैमरेज (मस्तिष्क आघात) के एक मरीज को रेफर करने पर जब 108 सेवा के लिए आपातकालीन सेवा के देहरादून मुख्यालय में फोन किया गया तो वहां से ‘माफ कीजिएगा! 108 सेवा में ईंधन नहीं है’ कहकर फोन रख दिया गया। बाद में मरीज को निजी वाहन से हल्द्वानी ले जाया गया। इस अव्यवस्था के लिए जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र मेहता ने डीएम को ज्ञापन सौंपा है। 

बता दें कि वज्यूला निवासी मोहन राम (59) को बुधवार रात अचानक ब्रेन हैमरेज हो गया। आननफानन में परिजन और जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र मेहता मोहन राम को मोहन सिंह मेहता सीएचसी बैजनाथ लेकर आए। यहां मोहन राम की गंभीर हालत को देखते हुए डॉ. आशुतोष ने प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।
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परिजनों ने जब 108 सेवा के लिए आपातकालीन सेवा के देहरादून मुख्यालय में फोन किया तो वहां से ‘माफ कीजिएगा! 108 सेवा में ईंधन नहीं है’ कहकर फोन रख दिया गया। इसके बाद परेशान तीमारदार मरीज को निजी वाहन से हल्द्वानी ले गए। इधर, ब्लॉक प्रमुख भरत फर्स्वाण का कहना है कि 108 सुविधा का विकास खंड में बुरा हाल है। विकास खंड को जो वाहन मिला है वह 10 साल पुराना हो गया है। मरीजों को सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। 

सीमित ईंधन और तकनीकी खराबी थी
गरुड़ के 108 वाहन में तकनीकी खराबी थी। वाहन को बृहस्पतिवार की सुबह मेंटेनेंस के लिए पिथौरागढ़ भेजा जाना था। सीमित ईंधन और मेंटेनेंस के कारण रात में आपातकालीन सेवा की सुविधा नहीं दी जा सकी। एंबुलेंस मेंटेनेंस के बाद बृहस्पतिवार देर शाम तक ब्लॉक मुख्यालय में आ जाएगी। बजट का अभाव जरूर है, लेकिन इस समय ईंधन का गंभीर संकट नहीं है।
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- हिम्मत चंद, कोऑर्डिनेटर, 108 सेवा। 

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