बागेश्वर। जनपद में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए शासन की ओर से किए गए डॉक्टरों के स्थानांतरण आदेश कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। शासन ने बीते 17 मार्च को जिले के लिए तीन विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के आदेश जारी किए थे, लेकिन डेढ़ महीना बीतने के बाद भी एक भी डॉक्टर ने जिले में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। चिकित्सकों की इस बेरुखी के चलते मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शासन ने पीएचसी किर्खु, पौड़ी गढ़वाल से एक ईएनटी सर्जन को जिला अस्पताल के लिए तैनात किया था। सीएचसी साहिया से एक सर्जन को सीएचसी गरुड़ और सीएचसी गरमपानी, नैनीताल से एक निश्चेतक को सीएमओके अधीन तैनाती के आदेश दिए गए थे। हैरानी की बात यह है कि लंबी अवधि बीतने के बाद भी ये डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का असर अब गंभीर रूप से दिखने लगा है। जिले के एकमात्र निश्चेतक के अवकाश पर जाने के कारण जिला अस्पताल में सर्जरी और सीजर प्रसव पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। एनेस्थेटिक न होने से सर्जन होने के बावजूद ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं, जिससे मरीजों को हल्द्वानी और अल्मोड़ा रेफर किया जा रहा है।
प्रशासन के दखल के बाद आए थे फिजिशियन
बीते दिनों नैनीताल के कालाखेत से एक फिजिशियन का स्थानांतरण भी जिला अस्पताल के लिए हुआ था। लंबे समय तक उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया, जिसके बाद जिला प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। प्रशासन की सख्ती के बाद चिकित्सक आदेश जारी होने के 15 दिन बाद कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे और वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन एक बार और कवायद करे तो चिकित्सक तैनाती के लिए जिले में आ सकते हैं।
........कोट
शासन ने 17 मार्च को जिले के लिए ईएनटी सर्जन, सर्जन और निश्चेतक की तैनाती के आदेश जारी किए गए थे। चिकित्सकों के निर्धारित समय के भीतर कार्यभार ग्रहण न करने के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जल्द ही इन चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि जनता को राहत मिल सके। - डॉ. कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ, बागेश्वर