सौर नववर्ष की महाशक्तिशाली बेला विषुवत संक्रांति (बैसाखी) मंगलवार 14 अप्रैल को है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस दिन सूर्य का मेष राशि में प्रवेश हो रहा है और इस कालखंड में ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण कुछ विशिष्ट राशियों और नक्षत्रों पर अपैट एवं वामपाद दोष का प्रभाव भी है। दोषों की शांति और वर्ष भर की शुभता के लिए शास्त्रों में अनुष्ठान अनिवार्य हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संवत्सर प्रतिपदा के दिन मेष, सिंह एवं धनु राशि और विषुवत संक्रांति के दिन कर्क, वृश्चिक एवं मीन राशि के जातकों को अपैट का दोष रहेगा। पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र, उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र और रेवती नक्षत्र अर्थात कुंभ राशि में पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र तथा संपूर्ण मीन राशि में वामपाद दोष का प्रभाव रहेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी ने बताया कि जिन जातकों का 14 अप्रैल को किन्हीं अपरिहार्य कारणों से उपाय न हो सके, वे आगामी पूर्णिमा तिथि पर इन उपायों को पूर्ण कर सकते हैं।
अपैट दोष निवारण
वामपाद दोष एवं निवारण
रुद्राभिषेक एवं दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान करें। दोष शांति के लिए चांदी का वामपाद (बायां पैर) बनवाकर दान करें। इसके अलावा लाल वस्त्र (प्रथम पूज्य गणेश जी के लिए), श्वेत वस्त्र, चावल, दही, दूध, घी, मोती एवं दक्षिणा सामर्थ्यानुसार शिव मंदिर में अर्पित कर आचार्य को दान दें।