बागेश्वर के कांडा महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार का शुभारंभ करतीं प्राचार्य डॉ. मधुलि
- फोटो : एलबीएस में राजनीतिक विषय पर परिचर्चा करते छात्र-छात्राएं
कांडा/बागेश्वर। राजकीय महाविद्यालय कांडा में उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आगाज हुआ। संगोष्ठी में 21 वीं सदी में हिमालयी क्षेत्रों में सतत विकास और पर्यावरण संबंधी चुनौतियां विषय पर विचार विमर्श किया गया। उच्चशिक्षा निदेशक डॉ. सीडी सुंठा और यूसर्क की निदेशक प्रो. अनीता रावत ने वर्चुअल संबोधन करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए सबको मिलकर काम करने पर जोर दिया। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता से कार्य करने पर जोर दिया। गोष्ठी के बाद महाविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया गया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मधुलिका पाठक ने किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत की। प्राचार्य डॉ. पाठक ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य की जरूरत है। युवाओं को पर्यावरण संरक्षण में विशेष भागीदारी निभानी होगी। सेवानिवृत प्राध्यापक प्रो. प्रकाश चंद्र तिवारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए लोगों को आवश्यकतानुसार क्रियाकलापों में परिवर्तन करना होगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. केएस कनवाल ने कहा कि प्रकृति से संबंध स्थापित करने के बाद ही पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन किया जा सकता है।
वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा ने अधिक से अधिक पौधरोपण करने और पेड़-पौधों की सुरक्षा संतान की तरह करने की बात कही। वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा ने अधिक से अधिक पौधरोपण करने और पेड़-पौधों की सुरक्षा संतान की तरह करने की बात कही। सीमैप के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी प्रवल प्रताप सिंह वर्मा ने जैव विविधता को बढ़ाने और उद्यमी सीएस पांडेय ने पर्यावरण संरक्षण को रोजगार से जोड़ने की बात कही। गोष्ठी में डिग्री कॉलेज गरुड़ की प्राचार्य डॉ. प्रेमलता कुमारी, डॉ. उमा पडलिया, केवलानंद, डॉ. विनोद साह ने भी विचार रखे।