बागेश्वर। कोरोना महामारी से बचाव के लिए ईजाद किए गए कोविड रोधी टीके की पहली डोज लगाने के लिए जो उत्साह लोगों ने दिखाया था वह एहतियाती टीका आने तक समाप्त होता दिखा। कोरोना का असर कम होने के बाद लोगों ने टीकाकरण से दूरी बना ली। जिले में कोविड रोधी टीके की डोज लक्ष्य से अधिक लोगों ने लगाई थी जबकि एहतियाती टीका लगाने का आंकड़ा 35 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाया है।
जिले में कोविड रोधी टीके की पहली डोज 2,16,013 लोगों को लगी थी जो 108 प्रतिशत रही। दूसरी डोज के समय आंकड़े कुछ कम हुए और 93.02 प्रतिशत लोगों ने ही दूसरी डोज लगाई। दूसरी डोज के दौरान ही कोरोना का असर कुछ कम होने लगा तो लोगों ने टीकाकरण से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। हालांकि बाद में फिर से देश में कोरोना के मामले बढ़ने शुरू हुए तो सरकार ने एहतियाती टीका लगवाने की अपील की। एहतियाती टीका लगाने दौरान ही कोविड महामारी का असर कम हो गया जिसका असर टीकाकरण पर भी दिखा। जिले में अब तक महज 33.15 फीसदी यानी 66,606 लोगों ने ही एहतियाती टीका लगवाया है। एहतियाती टीका लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से घर-घर टीकाकरण अभियान भी चलाया गया लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
कोवैक्सीन की 300 डोज, कोविशील्ड की शून्य
बागेश्वर। जिले में कोवैक्शीन के 300 एहतियाती डोज अभी उपलब्ध हैं लेकिन लोग टीकाकरण के लिए नहीं आ रहे हैं। बागेश्वर, कपकोट और बैजनाथ में विभाग की ओर से टीकाकरण का काउंटर लगाया गया है। हालांकि जिले में कोविशील्ड की एहतियाती डोज उपलब्ध नहीं होने से कई लोग टीका नहीं लगवा पा रहे हैं।
कोविड महामारी का असर कम होने के बाद लोगों ने टीका लगवाने में रुचि नहीं दिखाई। विभाग की ओर से चलाए गए व्यापक अभियान के बावजूद अधिकांश लोगों ने एहतियाती टीका नहीं लगवाया। वर्तमान में टीकाकरण काउंटर खुले हैं लेकिन लोग टीका लगवाने नहीं आ रहे हैं। - डॉ. प्रमोद जंगपांगी, नोडल अधिकारी, टीकाकरण।