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मैदानी क्षेत्रों की दौड़ काम न आई, घर पर ही ढूंढा रोजगार

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बागेश्वर के गरुड़ में मसाला पीसते उपेंद्र जोशी। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। अपने पहाड़ में करने वाले के लिए कोई कमी है। गरुड़ के शिक्षित नौजवान उपेंद्र जोशी को ही देख लीजिए। उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद रोजगार के लिए मैदानी क्षेत्रों की दौड़ लगाई। मनमाफिक काम न मिला तो लौट आए और अपने घर पर ही मसाला उद्योग लगाकर सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।
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गरुड़ तहसील के मटेना गांव निवासी 25 वर्षीय उपेंद्र जोशी ने राजनीतिशास्त्र से एमए किया। शिक्षा हासिल करने के बाद रोजगार नहीं मिला तो उन्होंने रुद्रपुर के सिडकुल समेत तमाम स्थानों में रोजगार के प्रयास किए लेकिन मन मुताबिक काम न मिलने पर वह गांव लौट आए और घर पर ही खुद का व्यवसाय स्थापित करने का मन बना लिया। उन्होंने जैविक मसालों की पिसाई के लिए चक्की लगाकर लघु उद्योग की शुरुआत की। यह 2016 की बात है। शुद्धता के कारण लोगों ने उनके मसालों को हाथों-हाथ लिया। उन्होंने स्थानीय काश्तकारों से पहाड़ी हल्दी, मिर्च, धनिया, जीरा और तेजपत्ता खरीदना शुरू कर दिया। इससे काश्तकारों की भी आय में वृद्धि होने लगी।
इसके बाद उपेंद्र ने गरुड़ की पुरानी बाजार में बागनाथ मसाला नाम से दुकान खोल ली। शुद्ध पहाड़ी मसालों का व्यापार कर वह साल में ढाई से तीन लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। क्षेत्र के काश्तकार अपने घरों की जरूरत के लिए मसालों की पिसाई अब उपेंद्र की ही चक्की से कराते हैं।
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कोरोना काल में घर लौटे प्रवासियों को दिखा रहे रोजगार की राह
बागेश्वर। उपेंद्र जोशी कोरोनाकाल में घर आए प्रवासियों को स्वावलंबन की राह दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि पहाड़ में भी रोजगार की अपार संभावनाएं हैं, जरूरत है तो सिर्फ धैर्य और मेहनत की। उपेंद्र का कहना है कि यदि व्यक्ति कुछ करने की ठान ले तो अल्प संसाधनों वाले पहाड़ पर भी खुशहाली के रास्ते पर कदम आगे बढ़ सकते हैं।
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