बागेश्वर में अधिकारियों की बैठक लेते डीएम विनीत कुमार। संवाद न्यूज एजेंसी
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पिरूल उद्योग स्थापित करने में आ रही दिक्कत को दूर करें
उरेडा की कार्यशाला में डीएम ने योजना के क्रियान्वयन में आ रही परेशानी पर चर्चा की
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। डीएम विनीत कुमार ने पिरूल उद्योग स्थापित करने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि सौर ऊर्जा और पिरूल युवाओं को घर पर रोजगार दे सकते हैं। इस दिशा में गंभीरता से काम करना होगा।
विकास भवन में उरेडा की कार्यशाला में जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना के साथ ही पिरूल से बिजली बनाने की योजना से भी बेरोजगार रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। डीएम ने योजना के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों के संबंध में चर्चा करते हुए वन विभाग, उरेडा, यूपीसीएल, उद्योग विभाग के साथ ही अन्य रेखीय विभागों को आदेश दिए कि वह लाभार्थियों की परेशानियों को तत्काल से दूर करें। कहा कि जंगलों में फैले पिरूल को एकत्र कर यदि इससे बिजली बनाने की योजना कारगर साबित होती है तो इससे न केवल बेरोजगारों को रोजगार मिल सकेगा बल्कि जंगलों में आग लगने की समस्या से भी निजात मिल सकती है।
कार्यशाला में उरेडा के परियोजना अधिकारी रॉकी कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के लिए अब तक ऑनलाइन पोर्टल पर 45 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 12 परियोजनाएं आवंटित कर दी गई हैं। शेष पर ग्रिड फिजिबिलिटी और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। यूपीसीएल के ईई भाष्कर पांडेय ने सोलर यूनिट लगाने की तकनीक के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आवेदक के सोलर प्लांट से ट्रांसफार्मर की अधिकतम 300 मीटर तक हवाई दूरी होनी चाहिए। यदि ट्रांसफार्मर 25 केवीए क्षमता का है तो 20 किलोवाट का पावर प्लांट अनुमन्य किया जाता है। यदि टांसफार्मर 25 केवीए से अधिक क्षमता का है तो 25 किलोवाट का पावर प्लांट टेक्निकल फिजिबल होता है। प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही ने बताया कि प्रदेश में चीड़ के वनों में वनाग्नि रोकने के लिए पिरूल से विद्युत उत्पादन और ब्रिकेट इकाइयों की स्थापना के लिए वर्ष 2018 में पिरूल नीति लागू की गई है। बैठक में सीडीओ डीडी पंत, लीड बैंक अधिकारी एनआर जौहरी, महाप्रबंधक उद्योग जीपी दुर्गापाल आदि मौजूद थे।
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