कपकोट/बागेश्वर। कपकोट सरयू नदी पर ब्लॉक और तहसील कार्यालय को जोड़ने वाला झूला पुल नौ साल बाद भी नहीं बन सका है। इस कारण लोगों को ब्लॉक और तहसील जाने के लिए ढाई किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
चार मार्च 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कपकोट भ्रमण के दौरान केदारेश्वर मैदान से कपकोट ब्लॉक मुख्यालय और तहसील कार्यालय को जोड़ने के लिए 100 मीटर लंबा झूला पुल बनाने की घोषणा की थी। 30 जून 2016 को शासन से 3.22 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। राशि स्वीकृत होने के चार साल बाद भी पुल नहीं बन सका है। पुल के अपरमेंट बनने के बाद से काम अधूरा पड़ा है।
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पैसा स्वीकृत होने के चार साल बाद भी पुल का निर्माण नहीं हो सका है। पैसा जारी होने के बाद तुरंत पुल बना दिया जाना चाहिए था। यह सरकारी सिस्टम की घोर लापरवाही है। पुल न बनने से जनता काफी परेशान है। - गिरीश चंद्र जोशी, पूर्व सभासद नगर पंचायत कपकोट।
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पुल न होने के कारण ब्लॉक और तहसील कार्यलय आने जाने के लिए ढाई किमी दूरी अतिरिक्त तय करनी पड़ रही है। इससे समय बर्बाद होने के साथ ही जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पुल का निर्माण जल्द किया जाना चाहिए। - प्रह्लाद सिंह कोश्यारी, प्रबंधक कपकोट वैली पब्लिक स्कूल।
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पुल न होने के कारण आम जनता को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। खासकर बरसात के दिनों में बहुत परेशानी उठानी पड़ती है। ब्लॉक और तहसील आने जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - विशन सिंह गढ़िया, राज्य आंदोलनकारी, कपकोट
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लंबे समय बाद भी पुल का निर्माण न होना क्षेत्र की जनता की अनदेखी है। जन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पुल का निर्माण जल्द किया जाना चाहिए। पुल नहीं बना तो जनता आंदोलन करने को मजबूर होगी। - सुंदर देव, सीएससी सेंटर संचालक तहसील कपकोट।
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कोट
झूला पुल को जोड़ने का सामान आ चुका है। इन दिनों सरयू नदी का जलस्तर बढ़ा है। जलस्तर कम होने पर डेढ़ माह के भीतर पुल का निर्माण कर दिया जाएगा। पुल का निर्माण विभाग की प्राथमिकता में है।
- हरीश चंद्र जोशी, एई लोक निर्माण विभाग, कपकोट।